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Monday, December 21, 2009

करंट

करंट को आप उस तरह सोचिये जैसे एक पाइप में पानी बहता है. हालाँकि पानी का उदाहरण ठीक नहीं है लेकिन वो धारा को समझने के लिए एक अच्छा तरीका है. किसी भी धातु में एलेक्ट्रोंस उपस्थित रहते हैं और गतिमान रहते हैं. किसी भी धातु में एलेक्ट्रोंस का एक दिशा में प्रवाह हीं करंट कहलाता है. करंट को हम एम्पिएर (A) में मापते हैं. करंट दो प्रकार के होते हैं:
  • दिष्ट धारा (Direct Current/DC)
  • प्रत्यावर्ती धारा (Alternative Current/AC)
दिष्ट धारा (Direct Current/DC): दिष्ट धारा वह धारा हैं जो सदैव एक ही दिशा में बहती हैं व जिसकी ध्रुवीयता नियत रहती हैं. इस प्रकार की धारा में +ve और -ve दोनों ध्रुव होते हैं. इसकी तुलना हम डिजिटल सर्किट से कर सकते हैं. कोई भी इलेक्ट्रोनिक कॉम्पोनेन्ट केवल दिष्ट धारा से ही चल सकती है. चूँकि इसमें सिर्फ दो परिमाण होते हैं इसलिए सारे डिजिटल सर्किट केवल इसी धारा पर चलते हैं न की प्रत्यावर्ती धारा पर.
प्रत्यावर्ती धारा (Alternative Current/AC): प्रत्यावर्ती धारा या पत्यावर्ती विभव का परिमाण (मैग्निट्यूड) समय के साथ बदलता रहता है और वह शून्य पर पहुंचकर विपरीत चिन्ह का (धनात्मक से ऋणात्मक या इसके उल्टा) भी हो जाता है। विभव या धारा के परिमाण में समय के साथ यह परिवर्तन कई तरह से सम्भव है। उदाहरण के लिये यह साइन-आकार (साइनस्वायडल) हो सकता है, त्रिभुजाकार हो सकता है, वर्गाकार हो सकता है, आदि। इनमें साइन-आकार का विभव या धारा का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है। आजकल दुनिया के लगभग सभी देशों में बिजली का उत्पादन एवं वितरण प्रायः प्रत्यावर्ती धारा के रूप में ही किया जाता है, न कि दिष्ट-धारा (डीसी) के रूप में। इसका प्रमुख कारण है कि एसी का उत्पादन आसान है; इसके परिमाण को बिना कठिनाई के ट्रान्सफार्मर की सहायता से कम या अधिक किया जा सकता है ; तरह-तरह की त्रि-फेजी मोटरों की सहायता से इसको यांत्रिक उर्जा में बदला जा सकता है। इसके अलावा श्रव्य आवृत्ति , रेडियो आवृत्ति , दृश्य आवृत्ति आदि भी प्रत्यावर्ती धारा के ही रूप हैं।

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