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Tuesday, January 12, 2010

P टाइप और N टाइप सेमीकंडक्टर

जैसा की हम जानते हैं कि सेमीकंडक्टर को हम चालक या अर्धचालक किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन शुद्ध रूप में एक सेमीकंडक्टर एक कुचालक के तरह काम करता है. शुद्ध रूप का मतलब है कि उसके बाहरी ऑर्बिट में पुरे चार एलेक्ट्रोंस रहते है जैसा कि आप यहाँ देख सकते हैं. इस तरह के सेमीकंडक्टर को हम इंट्रीसिक सेमीकंडक्टर कहते हैं. एक इंट्रीसिक सेमीकंडक्टर को हम सोनो तरह से इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसे चालक और कुचालक दोनों तरह से इस्तेमाल करने के लिए हमें इसमें कुछ अशुद्धता मिलानी पड़ती हैं. इस तरकीब को हम डोपिंग कहते हैं. हम इसमें दो तरह कि इम्पुरिटी मिला सकते हैं ट्राईवलेंट या पेंटावलेंट. जिस इम्पुरिटी के बाहरी ऑर्बिट में तीन एलेक्ट्रोंस रहते है उसे हम ट्राईवलेंट इम्पुरिटी कहते हैं और जिसके बाहरी ऑर्बिट में पांच एलेक्ट्रोंस रहते है उसे हम पेंटावलेंट इम्पुरिटी कहते है. जब हम किसी इंट्रीसिक सेमीकंडक्टर में इम्पुरिटी मिला देते हैं तो वो एक्सट्रीसिक सेमीकंडक्टर कहलाता है. चुकी इम्पुरिटी दो प्रकार कि होती है इसलिए एक्सट्रीसिक सेमीकंडक्टर भी दो प्रकार के होते हैं:

  • P टाइप सेमीकंडक्टर: जब हम प्योर सेमीकंडक्टर में ट्राईवलेंट इम्पुरिटी मिलते है तो सेमीकंडक्टर के बाहरी ऑर्बिट के चार एलेक्ट्रोंस इम्पुरिटी के तीन एलेक्ट्रोंस के साथ बोंड बना लेता है. जैसा कि हम जानते हैं कि कोई भी परमाणु अपने बहरी ऑर्बिट में आठ एलेक्ट्रोन पूरा करना चाहता है इसलिए ट्राईवलेंट इम्पुरिटी मिलाने के बाद उसमे एक एलेक्ट्रोन ग्रहण करने कि क्षमता होती है मतलब वहां एक होल उपस्थित हो जाता है (एलेक्ट्रोन कि अनुपस्थिति को होल कि उपस्थिति समझा जाता है). चूँकि होल को हम पोसिटिव चार्ज्ड पार्टिकल मानते हैं इसलिए इस तरह के सेमीकंडक्टर को P टाइप सेमीकंडक्टर कहते है. इसका मतलब है कि P टाइप सेमीकंडक्टर में होल्स कि मात्र अधिक और एलेक्ट्रोंस कि मात्र कम रहती है.

  • N टाइप सेमीकंडक्टर: जब हम प्योर सेमीकंडक्टर में पेंटावलेंट इम्पुरिटी मिलते है तो सेमीकंडक्टर के बाहरी ऑर्बिट के चार एलेक्ट्रोंस इम्पुरिटी के चार एलेक्ट्रोंस के साथ बोंड बना लेता है. इसके बाहरी ऑर्बिट में आठ एलेक्ट्रोंस पुरे होने के बाद भी इसके पास एक एलेक्ट्रोन बच जाता है. चूँकि एलेक्ट्रोन एक नेगटिव चार्ज्ड पार्टिकल है इसलिए इसे हम N टाइप सेमीकंडक्टर कहते है. इसका मतलब है कि P टाइप सेमीकंडक्टर में होल्स कि मात्र अधिक और एलेक्ट्रोंस कि मात्र कम रहती है. मतलब है कि N टाइप सेमीकंडक्टर में होल्स कि मात्र कम और एलेक्ट्रोंस कि मात्र अधिक रहती है.

4 comments:

  1. बी एस पाबलाJanuary 12, 2010 at 7:48 PM

    बहुत बढ़िया
    मैंने भी सोचा था, इलेक्ट्रानिक आधारित ऐसा ही कुछ हिन्दी में

    ब्लॉग की बधाई व भविष्य हेतु शुभकामनाएँ

    बी एस पाबला

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  2. बढ़िया।
    जरा LED (LIGHT EMITTING DIODES) के बारे में भी बताइए न ।

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