Jan 18, 2010

वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VOIP)

वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल कंप्यूटर द्वारा संचार का एक तुल्यकालिक कॉन्फ्रेन्सिंग साधन है। इसका प्रयोग प्रसारण तकनीक के लिए किया जाता है। इस तकनीक में ध्वनि संचार अंतर्जाल (वॉयस कम्युनिकेशन इंटरनेट) या पैकेट स्विच नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है। प्रायः इंटरनेट टेलीफोनी, आईपीटेलीफोनी को वीओईपी के समानरूप में प्रयोग किया जाता है। यदि इंटरनेट ब्रॉडबैंड नेटवर्क के माध्यम से चल रहा है, तो इसे ब्रॉडबैंड टेलीफोनी व ब्रॉडबैंड फोन कहते हैं। यह सेवा अन्य समानांतर सेवाओं से अपेक्षाकृत सस्ती होती है। यह दूरभाष सेवा आईपीटीवी सेवा के संग भी मिलती है। यह सेवा मोबाइल सेवा से भी सस्ती होती है, और इंटरनेट पर तो इसे मुफ्त भी प्रयोग किया जा सकता है।

आवासीय नेटवर्क में वीओआईपी तंत्रजाल का आरेखवीओआईपी संचार और अवसंरचना की कीमत कम कर देता है। यह वाणी पाठ संपीड़न यानि स्पीच डाटा कंप्रेशन तकनीक का प्रयोग करता है, जिसके कारण यह डाटा रेट कम करता है। वीओआईपी का डुप्लीकेट नेटवर्क सिस्टम बनाना सरल नहीं है, इस कारण इसकी टैपिंग आदि का खतरा नहीं है। एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर एक ही समय में एक से ज्यादा टेलीफोन कॉल को प्रसारित कर सकते हैं। इससे वीओआईपी के रूप में आपको अतिरिक्त टेलीफोन लाइन मिल जाती है। यानि कम लाइनों में ही अधिक संचार सुविधा। इस सेवा को दूसरी सेवाओं के साथ जोड़कर देखा जा सकता है जैसे वीडियो संदेश आदान-प्रदान, मैसेज, डाटा संचिका अंतरण, ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि भी कर सकते हैं। इस सेवा में एडवांस टेलीफोनी फीचर जैसे कॉल रूटिंग, स्क्रीन पॉप और आईवीआर की सुविधा उपलब्ध होती है। जहां आम टेलीफोन सीधे टेलीफोन कंपनी की फोन लाइन से जुड़े होते हैं जो प्रायः कई कारणों से बेकार हो जाते हैं, तो वहीं वीओईपी सीधे सर्वर रूटर से जुड़े होते हैं, जिसकी वजह से उनकी खराब होने की संभावना कम होती है। नेटवर्क व्यस्त रहने जैसी शिकायत आईपी नेटवर्क में सामान्यत: नहीं होती। अतः यह लंबी दूरी की कॉल करने का प्रभावी तरीका है। इसका प्रयोग आजकल आतंकवादियों में भी बहुत प्रचलित हो रहा है। वीओआईपी के द्वारा बुरी नीयत से कुछ लोग इंटरनेट पर प्रयोक्तानाम और पासवर्ड भी चुराते पाये गये हैं, जिसे विशिंग कहा जाता है।