May 20, 2010

कम्प्यूटर हार्डवेयर

साधारण रूप से कम्प्यूटर के वे सभी प्रभाग जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता है, कम्प्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्प्यूटर के यांत्रिक, वैद्युत तथा इलैक्ट्रोनिक प्रभाग आते हैं। कम्प्यूटर के अन्दर तथा बाहर के सभी प्रभाग, कम्प्यूटर की इनपुट तथा आउटपुट युक्तियां आदि सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर ही हैं। कम्प्यूटर की वे युक्तियां, जो कि कम्प्यूटर को चलाए जाने के लिए आवश्यक होती हैं, स्टेण्डर्ड युक्तियां कहलाती हैं. जैसे- की-बोर्ड, फ्लॉपी ड्राइव, हार्डडिस्क आदि। इन युक्तियों के अतिरिक्त वे युक्तियां, जिनको कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है, पेरीफेरल युक्तियां कहलाती है। स्टैण्डर्ड तथा पेरीफेरल युक्तियों को मिलाकर ही कम्प्यूटर हार्डवेयर तैयार होता है।

इनपुट और आउटपुट उपकरण कम्प्यूटर और मानव के मधय सम्पर्क की सुविधा प्रदान करते हैं। इनपुट डिवाइसेज मानवीय भाषा में दिये गये डाटा और प्रोग्रामों को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवर्तित करती हैं। दूसरी ओर आउटपुट डिवाइसेज 0 और 1 बिट के संकेतों को अनुवादित कर मानव के समझने योग्य भाषा में परिवर्तित कर प्रस्तुत करते हैं। ये डिवाइसेज को स्क्रीन पर या पिंटर द्वारा कागज पर छापकर प्रस्तुत करते हैं। इनपुट या आउटपुट डिवाइसेज प्रायः कम्प्यूटर के सीधे नियंत्रण में रहते हैं। ऑपरेटर इंटरफेस कम्प्यूटर से ऑपरेटर का (कार्य़ करते समय) सम्पर्क इंटरफेस कहलाता है। 

ऑपरेटर इंटरफेस: कम्प्यूटर से ऑपरेटर का (कार्य़ करते समय) सम्पर्क इंटरफेस कहलाता है। ये उचित इनपुट हार्डवेयर और डिस्प्ले सॉफ्टवेयर उपलब्ध हो तो ऑपरेटर जो कि डिस्प्ले डिवाइस के सम्पर्क में है अपने कार्य को प्रभावशाली रूप से कर सकता है। हार्डवेयर इंटरफेस ऑपरेटर कम्प्यूटर के मानीटर और इनपुट डिवाइस का एक साथ उपयोग करता है। इनपुट डिवाइस के रूप में प्रायः की बोर्ड या माउस का प्रयोग किये जाते हैं। जब भी की बोर्ड से किसी अक्षर या कैरेक्टर की कुंजी दबाई जाती है तो यह करेक्टर डिस्प्ले स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति में दिखाई देता है। कर्सर स्क्रीन पर टिमटिमाता एक चिन्ह होता है जो यह बताता है कि ऑपरेटर द्वारा इनपुट कैरेक्टर कहाँ दिखाई देगा माउस स्क्रीन पर उपस्थित कर्सर या पॉइटंर को इधर-उधर ले जाने का कार्य करता है।

इनपुट डिवाइस: जिन युक्तियों का प्रयोग डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए किया जाता है, वे सभी युक्तियां आगम अथवा इनपुट युक्तियां कहलाती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि मानवीय भाषा में प्रविष्ट किए जा रहे डेटा अथवा प्रोग्राम को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवतर्तित करने के लिए प्रयोग की जाने वाली युक्तियों को इनपुट युक्तियां कहा जाता है। ये युक्तियां अक्षरों, अंकों तथा अन्य विशिष्ट चिन्हों को बायनरी डिजिट अर्थात 0 तथा 1 में परिवर्तित करके सी.पी.यू. के समझने योग्य बनाती हैं। इनपुट के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त की जाने वाली युक्ति की-बोर्ड और माउस है।  इन्हें अलग अलग श्रेणियों में बात जा सकता है. कुछ और इनपुट डिवाइस हैं:
  • की-बोर्ड
  • टैकर बॉल
  • लाइट पेन
  • जायस्टिक
  • हैण्ड-हैल्ड टर्मिनल
  • बार-कोड रिकॉगनेशन
  • OMR, OCR एवं MICR  
  • स्कैनर
  • माइक
ऑन लाइन इनपुट डिवाइसेज: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम सिस्टम में सीधे इनपुट प्रदान कर सकते हैं। यह सिस्टम से जुड़े रहते हैं। उदाहरण - माऊस ,की-बोर्ड ,लाइट पेन ,जायस्टिक आदि।
ऑफ लाइन इनपुट डिवाइसेज: यह वह युक्तियाँ हैं जिसमे सिस्टम में जोड़ने से पहले हम इनपुट तैयार कर लेते हैं और फिर आवश्यकता अनुसार उनसे इनपुट पढ़ने के लिए उन्हें हम सिस्टम से जोड़ लेते हैं। उदाहरण - की से पंच कार्ड, की से टेप सिस्टम आदि।
सोर्सडेटा इनपुट युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जो किसी भी सोर्ससे इनपुट पढ़ सकती हैं व सिस्टम में संचित कर लेती हैं । बाद में उसे आवश्यकता के अनुसार गणना के लिए उपयोग किया जा सकता है । उदाहरण -प्वांइट ऑफ सेल टर्मिनल,स्कैनर आदि

आउटआउट डिवाइस: निर्गम उपकरण से तात्पर्य ऐसे उपकरणों से होता है जो कि किसी संगणना के परिणामों को निर्गम तक पहुंचाते हैं। ये परिणाम दृश्य प्रदर्शन इकाई द्वारा दिखलाये जा सकते हैं, प्रिन्टर द्वारा मुद्रित कराये जा सकते हैं, चुम्बकीय माध्यमों पर संग्रहित किये जा सकते हैं अथवा अन्य किसी विधि द्वारा यह निर्गम प्राप्त किये जा सकते हैं। एक कम्प्यूटर प्रणाली के विभिन्न अवयवों में कई उपकरण जो कि चुम्बकीय सिद्धान्तों पर कार्य करते हैं. कम्प्यूटर में आंकड़ों के आगम एवं निर्गम दोनों ही उपयोगों हेतु प्रयोग किये जाते हैं निर्गम युक्तियाँ दो प्रकार की होती है:
  • हार्ड कॉपी युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम कागज पर आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं । जैसे प्रिन्टर, प्लॉटर
  • सॉफ्ट कॉपी युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम सिस्टम पर अस्थाई रूप में आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं जैसे मॉनिटर, L.C.D इत्यादि.
मुद्रण यन्त्र: मुद्रण यन्त्रों से तात्पर्य एक ऐसी प्रणाली से होता है जिसमें कि कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों को कागज के ऊपर छाप कर स्थायी रूप से उपयोगकर्ता को प्रस्तुत किया जाता है। इस पद्धति द्वारा प्राप्त परिणाम कागज पर मुद्रित होने के कारण स्थायी रूप से प्राप्त होते हैं जो कि मानव द्वारा पठनीय होते हैं मुद्रण यन्त्र कम्प्यूटर से परिणामों को विद्युत तरंगों के रूप में प्राप्त करता है एवं उन्हें कूट संकेत के अनुसार अक्षरों में परिवर्तित करके कागज पर छाप देते हैं। यह छापने की प्रक्रिया मुद्रण यन्त्र के प्रकार एवं उसमें उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार सम्पन्न होती है। 
  • समघात मुद्रण यन्त्र: ऐसे मुद्रण यन्त्र जिनमें कि अक्षर को मुद्रित कराने हेतु किसी ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाता है जिसमें कि अक्षर को कागज पर छापने के लिये अक्षर एवं कागज के मध्य स्याही युक्त फीते का इस्तेमाल किया जाता है एवं कागज पर उस अक्षर की आकृति उभारने हेतु किसी विधि से अक्षर पर पीछे की ओर से प्रहार किया जाता है, समघात मुद्रण यन्त्र कहलाते हैं।
  • असमघात मुद्रण यन्त्र: इनमें उपरोक्त अन्य मुद्रण यन्त्रों की भांति किसी हथौड़े इत्यादि की तकनीक का उपयोग नहीं किया जाता है। इसमें डॉट मैट्रिक्स मुद्रण यन्त्र की भाँति छोटी-छोटी पिनें नहीं होतीं बल्कि पिनों के स्थान पर छोटे-छोटे विभिन्न नोजल लगे होते हैं जिनसे कि कम्प्यूटर से प्राप्त संकेतों के अनुसार स्याही की पतली विभिन्न धारायें छूटती हैं जो कि आपस में मिलकर वांछित अक्षर की आकृति बना देती हैं।
ग्राफ प्लॉटर: ग्राफ प्लॉटर कम्प्यूटर निर्गम की एक ऐसी इकाई होती है जिसके द्वारा ग्राफों तथा डिजाइनों की स्थायी प्रतिलिपि प्राप्त कर सकते हैं। कम्प्यूटर निर्गम हेतु अन्य प्रयुक्त की जाने वाली विधियाँ जिनमें कि निर्गम स्थायी प्रतिलिपि के रूप में प्राप्त होता है। ग्राफ, डिजाइनों एवं अन्य आकृतियों को एकदम सही तरीके से नहीं छाप सकती। अर्थात यदि हमें निर्गम के रूप में स्पष्ट एवं उचित आकृतियों की आवश्यकता हो तो इस यन्त्र का उपयोग किया जाता है। इससे काफी उच्च कोटि की परिशुद्धता प्राप्त की जा सकती है । यह एक इन्च के हजारवें भाग के बराबर बिन्दु को भी छाप सकता है।

प्राइमरी मेमोरी: यह वह युक्तियाँ होती हैं जिसमें डेटा व प्रोग्राम्स तत्काल प्राप्त एवं संग्रह किए जाते हैं।
रीड-राइट मेमोरी, रैम (RAM): इस मेमोरी में प्रयोगकर्ता अपने प्रोग्राम को कुछ देर के लिए स्टोर कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस मेमोरी को RAM कहते हैं। यही कम्प्यूटर की बेसिक मेमोरी भी कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है:
  • डायनेमिक रैम (DRAM): डायनेमिक का अर्थ है गतिशील। इस RAM पर यदि 10 आंकड़े संचित कर दिए जाएं और फिर उनमें से बीच के दो आंकड़े मिटा दिए जाएं, तो उसके बाद वाले बचे सभी आंकड़े बीच के रिक्त स्थान में स्वतः चले जाते हैं और बीच के रिक्त स्थान का उपयोग हो जाता है।
  • स्टैटिक रैम (SRAM): स्टैटिक रैम में संचित किए गए आंकड़े स्थित रहते हैं। इस RAM में बीच के दो आंकड़े मिटा दिए जाएं तो इस खाली स्थान पर आगे वाले आंकड़े खिसक कर नहीं आएंगे। फलस्वरूप यह स्थान तब तक प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक कि पूरी मेमोरी को “वाश” करके नए सिरे से काम शुरू न किया जाए। 
रीड ओनली मेमोरी, ROM (Read Only Memory): ROM उसे कहते हैं, जिसमें लिखे हुए प्रोग्राम के आउटपुट को केवल पढ़ा जा सकता है, परन्तु उसमें अपना प्रोग्राम संचित नहीं किया जा सकता। ROM में अक्सर कम्प्यूटर निर्माताओं द्वारा प्रोग्राम संचित करके कम्प्यूटर में स्थाई कर दिए जाते हैं, जो समयानुसार कार्य करते रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेटर को निर्देश देते रहते हैं। बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम ( BIOS) नाम का एक प्रोग्राम ROM का उदाहरण है, जो कम्प्यूटर के ऑन होने पर उसकी सभी इनपुट आउटपुट युक्तियों की जांच करने एवं नियंत्रित करने का काम करता है। ये भी कई प्रकार के होते है:
  • प्रोग्रामेबिल रॉम (PROM): इस स्मृति में किसी प्रोग्राम को केवल एक बार संचित किया जा सकता है, परंतु न तो उसे मिटाया जा सकता है और न ही उसे संशोधित किया जा सकता है।
  • इरेजेबिल प्रॉम (EPROM): इस I.C. में संचित किया गया प्रोग्राम पराबैंगनी किरणों के माध्यम से मिटाया ही जा सकता है। फलस्वरुप यह I.C. दोबारा प्रयोग की जा सकती है।
  • इलेक्ट्रिकली-इ-प्रॉम (EEPROM): इलेक्ट्रिकली इरेजेबिल प्रॉम पर स्टोर किये गये प्रोग्राम को मिटाने अथवा संशोधित करने के लिए किसी अन्य उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। कमाण्ड्स दिये जाने पर कम्प्यूटर में उपलब्ध इलैक्ट्रिक सिगल्स ही इस प्रोग्राम को संशोधित कर देते हैं। 
सेकेंडरी मेमोरी: यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमे संग्रहित डेटा तथा प्रोग्राम्स कम्प्यूटर के ऑफ होने के बाद भी इसमे स्थित रहते है।
  • मैगनेटिक टेप: डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित कर सकने वाले उपकरणों में मैगनेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसमें ½ इन्च चौड़ाई वाली प्लास्ट्रिक की बिना जोड़ वाली लम्बी पटी होती है। जिस पर फैरोमेग्नेटिक पदार्थ की पर्त चढ़ाई जाती है। इस पट्टी को ही हम टेप कहते हैं। टेप विभिन्न लम्बाइयों में उपलब्ध होता है। प्रायः 400, 800, 1200 या 2400 फीट लम्बाई वाले मैगनेटिक टेप उपलब्ध होते हैं।टेप पर डाटा मेगनेटाइज्ड या नॉन मैगनेटाईज्ड बिन्दुओं के रूप में लिखा जाता है। एक अक्षर के लिए 7 बिट या 9 बिट कोड प्रयोग में लाया जाता हैमैगनेटाइज्ड एवं नॉन मैगनेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम Tracks कहते हैं। 
  • मैगनेटिक डिस्क: मैगनेटिक डिस्क की तुलना रिकार्ड प्लोयर के लॉग प्लेविंग L.P. रिकार्ड से कर सकते हैं। ऐसे कई रिकार्डस या डिस्क को एक के ऊपर एक कुछ अन्तर से लगा दिया जाय तो वे मैगनेटिक डिस्क के समान दिखेगें। सभी डिस्क एक के ऊपर एक समान्तर लगी होती है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते हैं। डिस्क पैक में 11 अथवा 20 ऐसी सतहें होती है। प्रायः सबसे ऊपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं। जो डाटा को लिखने और पढ़ने का काम करते हैं। ये डाटा को Tracks के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं। 
  • फ्लॉपी डिस्क: यह एक छोटी लचीली डिस्क होती है जिसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता बहुत अधिक नहीं होती। कीमत की लिहाज से यह बहुत सस्ती होती है। एक लचीली प्लास्टिक शीट के ऊपर मैगनेटिक ऑक्साइड कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसके एक रीड/राइट हेड होता है जो फ्लॉपी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढ़ता है। ये  १.४४ और २.८८ MB कि क्षमता में उपलब्ध होती है. फ्लापी डिस्क कि तरह ही एक ZIP डिस्क होता है जिसकी क्षमता १०० MB होती है.  
  • पेन ड्राइव: ये एक एक्सटर्नल स्टोरेज होता है जिसे हम सीधे USB पोर्ट पर लगा सकते हैं. ये इस्तेमाल करने में बहुत आसन होता है और आसानी से उपलब्ध भी है. इसकी डाटा संग्रह करने कि क्षमता भी ज्यादा होती है. ये सामान्यतः १, २, ४, ८, १६ GB या उससे भी अधिक क्षमता में उपलब्ध है. यही कारण है कि आजकल इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है.
  • CD/DVD ड्राइव: ये भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज डिवाइस में से है. ये सस्ती होती है और इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है. आम  तौर पर एक CD की संग्रहण क्षमता ७००-८०० MB और एक DVD की अधिकतम क्षमता १७ GB होती है.
  • हार्ड डिस्क ड्राइव: ये किसी भी कम्पुटर की सबसे मुख्य स्टोरेज डिवाइस होती है. इसकी संग्रहण क्षमता बहुत अधिक होती है इसलिए ये कंप्यूटर के मुख्य संग्रहनक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. आजकल हार्ड डिस्क ड्राइव ४०, ८०, १६०, ३२०, ५०० GB या उससे अधिक क्षमता में उपलब्ध है.
आभारी टी.डी.आई.एल.