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Wednesday, May 26, 2010

सॉफ्टवेर, एप्लीकेशन, ऑपरेटिंग सिस्टम एवं नेटवर्क

सॉफ्टवेयर उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं और जिनके द्वारा हमारे सारे काम कराए जाते हैं बिना सॉफ्टवेयर के कम्प्यूटर से कोई भी काम करा पाना असंभव है। सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते है:
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर: सिस्टम सॉफ्टवेयर ऐसे प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनका काम सिस्टम अर्थात कम्प्यूटर को चलाना तथा उसे काम करने लायक बनाए रखना है। सिस्टम सॉफ्टवेयर ही हार्डवेयर में जान डालता है। ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्पाइलर आदि सिस्टम सॉफ्यवेयर के मुख्य भाग हैं। 
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर: एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर ऐसे प्रोग्रामों को कहा जाता है, जो हमारे असली कामों को करने के लिए लिखे जाते हैं। आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न उपयोगों के लिए भिन्न-भिन्न सॉफ्टवेयर होते हैं। वेतन की गणना, लेन-देन का हिसाब, वस्तुओं का स्टाक रखना, बिक्री का हिसाब लगाना आदि कामों के लिए लिखे गए प्रोग्राम,  माइक्रोसोफ्ट ऑफिस इत्यादि एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण हैं।
कम्पाइलर: कम्पाइलर एक ऐसा प्रोग्राम है, जो किसी उच्चस्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम का अनुवाद किसी कम्प्यूटर की मशीनी भाषा में कर देता है। कम्पाइलर किसी कम्प्यूटर के सिस्टम साफ्टवेयर का भाग होता है। यह कम्प्यूटर के साथ ही खरीदा जाता है। हर प्रोग्रामिंग भाषा के लिए अलग-अलग कम्पाइलर होता है पहले वह हमारे प्रोग्राम के हर कथन या आदेश की जांच करता है कि वह उस प्रोग्रामिंग भाषा के व्याकरण के अनुसार सही है या नहीं ।यदि प्रोग्राम में व्याकरण की कोई गलती नहीं होती, तो कम्पाइलर के काम का दूसरा भाग शुरू होता है। यदि कोई गलती पाई जाती है, तो वह बता देता है कि किस कथन में क्या गलती है। यदि प्रोग्राम में कोई बड़ी गलती पाई जाती है, तो कम्पाइलर वहीं रूक जाता है। तब हम प्रोग्राम की गलतियाँ ठीक करके उसे फिर से कम्पाइलर को देते हैं। 

इन्टरप्रिटर: इन्टरपेटर भी कम्पाइलर की भांति कार्य करता है। अन्तर यह है कि कम्पाइलर पूरे प्रोग्राम को एक साथ मशीनी भाषा में बदल देता है और इन्टरपेटर प्रोग्राम की एक-एक लाइन को मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है। प्रोग्राम लिखने से पहले ही इन्टरपेटर को स्मृति में लोड कर दिया जाता है।

कम्पाइलर और इन्टरप्रिटर में अन्तर: इन्टरपेटर उच्च स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम की प्रत्येक लाइन के कम्प्यूटर में प्रविष्ट होते ही उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित कर लेता है, जबकि कम्पाइलर पूरे प्रोग्राम के प्रविष्ट होने के पश्चात उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है। 

कम्प्यूटर वायरस: वायरस प्रोग्रामों का प्रमुख उददेश्य केवल कम्प्यूटर मेमोरी में एकत्रित आंकड़ों व संपर्क में आने वाले सभी प्रोग्रामों को अपने संक्रमण से प्रभावित करना है। वास्तव में कम्प्यूटर वायरस कुछ निर्देशों का एक कम्प्यूटर प्रोग्राम मात्र होता है जो अत्यन्त सूक्षम किन्तु शक्तिशाली होता है। यह कम्प्यूटर को अपने तरीके से निर्देशित कर सकता है। ये वायरस प्रोग्राम किसी भी सामान्य कम्प्यूटर प्रोग्राम के साथ जुड़ जाते हैं और उनके माध्यम से कम्प्यूटरों में प्रवेश पाकर अपने उददेश्य अर्थात डाटा और प्रोग्राम को नष्ट करने के उददेश्य को पूरा करते हैं। अपने संक्रमणकारी प्रभाव से ये सम्पर्क में आने वाले सभी प्रोग्रामों को प्रभावित कर नष्ट अथवा क्षत-विक्षत कर देते हैं। वायरस से प्रभावित कोई भी कम्प्यूटर प्रोग्राम अपनी सामान्य कार्य शैली में अनजानी तथा अनचाही रूकावटें, गलतियां तथा कई अन्य समस्याएं पैदा कर देता है ।प्रत्येक वायरस प्रोग्राम कुछ कम्प्यूटर निर्देशों का एक समूह होता है जिसमें उसके अस्तित्व को बनाएं रखने का तरीका, संक्रमण फैलाने का तरीका तथा हानि का प्रकार निर्दिष्ट होता है । सभी कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम मुख्यतः असेम्बली भाषा या किसी उच्च स्तरीय भाषा जैसे पास्कल या सी में लिखे होते हैं। ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते है: बूट सेक्टर वायरस, फाइल वायरस तथा अन्य वायरस.

वायरस का उपचार: जिस प्रकार वायरस सूक्षम प्रोग्राम कोड से अनेक हानिकारक प्रभाव छोड़ता है ठीक उसी तरह ऐसे कई प्रोग्राम बनाये गये हैं जो इन वायरसों को नेस्तानाबूद कर देते हैं, इन्हें ही वायरस के टीके या एंटीवाइरस कहा जाता है। यह टीके विभिन्नन वायरसों के चरित्र और प्रभाव पर संपूर्ण अध्ययन करके बनाये गये हैं और काफी प्रभावी सिद्ध हुयें है। नोर्टन, AVG, अवीरा तथा मैक्फी एंटीवाइरस सॉफ्टवेर के उदाहरण है.

ऑपरेटिंग सिस्टम: ऑपरेटिंग सिस्टम व्यवस्थित रूप से जमे हुए साफ्टवेयर का समूह है जो कि आंकडो एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है. आपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर एवंसाफ्टवेयर के बिच सेतु का कार्य करता है कम्पयुटर का अपने आप मे कोई अस्तित्व नही है। यह केवल हार्डवेयर जैसे की-बोर्ड, मानिटर , सी.पी.यू इत्यादि का समूह है आपरेटिंग सिस्टम समस्त हार्डवेयर के बिच सम्बंध स्थापित करता है आपरेटिंग सिस्टम के कारण ही प्रयोगकर्ता को कम्युटर के विभिन्न भागो की जानकारी रखने की जरूरत नही पडती है साथ ही प्रयोगकर्ता अपने सभी कार्य तनाव रहित होकर कर सकता है यह सिस्टम के साधनो को बांटता एवं व्यवस्थित करता है।

आपरेटिंग सिस्टम के कई अन्य उपयोगी विभाग होते है जिनके सुपुर्द कई काम केन्द्रिय प्रोसेसर द्वारा किए जाते है। उदाहरण के लिए प्रिटिंग का कोई किया जाता है तो केन्द्रिय प्रोसेसर आवश्यक आदेश देकर वह कार्य आपरेटिंग सिस्टम पर छोड देता है और वह स्वयं अगला कार्य करने लगता है। इसके अतिरिक्त फाइल को पुनः नाम देना, डायरेक्टरी की विषय सूचि बदलना, डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य आपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किए जाते है। इसके अन्तर्गत निम्न कार्य तथा प्रकार आते है: 
  • फाइल पद्धति: फाइल बनाना, मिटाना एवं फाइल एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना, फाइल निर्देशिका को व्यवस्थित करना। 
  • प्रक्रिया: प्रोग्राम एवं आंकडो को मेमोरी मे बाटना एवं प्रोसेस का प्रारंभ एवं समानयन करना। प्रयोगकर्ता मध्यस्थ फाइल की प्रतिलिपी, निर्देशिका,  इत्यादि के लिए निर्देश, रेखाचित्रिय डिस्क टाप आदि. 
  • इनपुट/आउटपुट: मानिटर, प्रिंटर, डिस्क आदि के लिए मध्यस्थ.  
  • मेमोरी प्रबंधन: प्रोग्राम एवं आकडो को क्रियान्वित करने से पहले मेमोरी मे डालना पडता है अधिकतर आपरेटिंग सिस्टम एक समय मे एक से अधिक प्रोग्राम को मेमोरी मे रहने की सुविधा प्रदान करता है आपरेटिंग सिस्टम यह निश्चित करता है कि प्रयोग हो रही मेमोरी अधिलेखित न हो प्रोग्राम स्माप्त होने पर प्रयोग होने वाली मेमोरी मुक्त हो जाती है। 
  • मल्टी प्रोग्रामिंग: एक ही समय पर दो से अधिक प्रक्रियाओ का एक दूसरे पर प्रचालन होना मल्टी प्रोग्रामिंग कहलाता है। विशेष तकनिक के आधार पर सी.पी.यू. के द्वारा निर्णय लिया जाता है कि इन प्रोग्राम मे से किस प्रोग्राम को चलाना हैएक ही समय मे सी.पी. यू. किसी प्रोग्राम को चलाता है. 
  • मल्टी प्रोसेसिंग: एक समय मे एक से अधिक कार्य के क्रियान्वयन के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी.पी.यू रहते है। इस तकनीक को मल्टी प्रोसेसिंग कहते है। मल्टी प्रोसेसिंग सिस्टम का निर्माण मल्टी प्रोसेसर सिस्टम को ध्यान मे रखते हुए किया गया है। अतः  एक से अधिक प्रोसेसर उपल्ब्ध होने के कारण इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसींगतीनो कार्यो के मध्य समन्वय रहता है। एक ही तरह के एक से अधिक सी.पी. यू का उपयोग करने वाले सिस्टम को सिमिट्रिक मल्टी प्रोसेसर सिस्टम कहा जाता है.
  • मल्टी टास्किंग: मेमोरी मे रखे एक से अधिक प्रक्रियाओ मे परस्पर नियंत्रण मल्टी टास्किंग कहलाता है किसी प्रोग्राम से नियत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है जब नियंत्रण इस प्रोग्राम पर आता है प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था मे रहता है। मल्टी टास्किंग मे यूजर को ऐसा प्रतित होता है कि सभी कार्य एक साथ चल रहे है। 
  • मल्टी थ्रेडिंग: यह मल्टी टास्किंग का विस्तारित रूप है एक प्रोग्राम एक से अधिक थ्रेड एक ही समय मे चलाता है। उदाहरण के लिए एक स्प्रेडशिट लम्बी गरणा उस समय कर लेता है जिस समय यूजर आंकडे डालता है.  
  • रियल टाइम: रियल टाइम आपरेटिंग सिस्टम की प्रक्रिया बहुत ही तीव्र गति से होती है रियल टाइम आपरेटिंग सिस्टम का उपयोग तब किया जाता है जब कम्पयुटर के द्वारा किसी कारेय विशेष का नियंत्रण किया जा रहा होता है। इस प्रकार के प्रयोग का परिणाम तुरंत प्राप्त होता है । और इस परिणाम को अपनी गरणा मे तुरंत प्रयोग मे लाया जाता है। आवशअयकता पडने पर नियंत्रित्र की जाने वाली प्रक्रिया को बदला जा सकता है। इस तकनीक के द्वारा कम्पयुटर का कार्य लगातार आंकडे ग्रहण करना उनकी गरणा करना मेमोरी मे उन्हे व्यवस्थित करना तथा गरणा के परिणाम के आधार पर निर्देश देना है.
उपयोगकर्ता की गिनती के आधार पर आपरेटिंग सिस्टम को दो भागो मे विभाजित किया गया है:
  • एकल उपयोगकर्ता (सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम): एकल उपयोगकर्ता आपरेटिंग सिस्टम वह आपरेटिंग सिस्टम है जिसमे एक समय मे केवल एक उपयोगकर्ता काम कर सकता है। सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम में कम्प्यूटर पर एक समय में एक आदमी काम सकता है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्यतः पर्सनल कम्प्यूटरों में प्रयोग किए जाते हैं, जिनका घरों व छोटे कार्यालयों में उपयोग होता है। डॉस, विंडोज ३ इसी के उदाहरण है।
  • बहुल उपयोगकर्ता (मल्टी यूजर आपरेटिंग सिस्टम): वह आपरेटिंग सिस्टम जिसमे एक से अधिक उपयोगकर्ता एक ही समय मे काम कर सकते कर सकते है. मल्टीयूजर प्रकार के सिस्टमों में एक समय में बहुत सारे व्यक्ति काम कर सकते हैं और एक ही समय पर अलग-अलग विभिन्न कामों को किया जा सकता है। जाहिर है, इससे कम्प्यूटर के विभिन्न संसाधनों का एक साथ प्रयोग किया जा सकता है। यूनिक्स इसी प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम है।
काम करने के मोड के आधार पर भी इसे दो भागो मे विभाजित किया गया है:
  • कैरेक्टर यूजर इंटरफेस (CLI): जब उपयोगकर्ता सिस्टम के साथ कैरेक्टर के द्वारा सूचना देता है तो इस आपरेटिंग सिस्टम को कैरेक्टर यूजर इंटरफेस कहते है. उदाहरण डॉस, यूनिक्स. 
  • ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI): जब उपयोग कर्ता कम्पयुटर से चित्रो के द्वारा सूचना का आदान प्रदान करता है तो इसे ग्राफिकल यूजर इंटरफेस कहा जाता है। ये GUI के साथ साथ CLI को भी सपोर्ट करता है. उदाहरण विंडोस, लिनक्स.
नेटवर्किंग: आज के युग मे उपयोगकर्ता को इलेक्ट्रानिक संचार की आवश्यकता है लोगो के परस्पर सूचना के संचार के संचार के लिए तकनीक की आवश्यकता है। एक अच्छी सूचना संचार पद्धति प्रत्येक संस्थानो के लिए आवश्यक है संस्थाए सूचना की प्रक्रिया के लिए परस्पर जुडे हुए कम्प्यूटर पर निर्भर रहती है इलेकट्रानिकी की सहायता एक से स्थान से दूसरे स्थान पर सूचना प्रेषित करने की क्रिया को दूरसंचार कहते है । एक या एक से अधिक कम्प्यूटर और विविध प्रकार के टर्मिनलो के बीच आंकडो को भेजना या प्राप्त करना डाटा संचार कहलाता है। सामान्यतया संचार नेटवर्क मे किसी चैनल के माध्यम से प्रेषक अपना संदेश प्राप्तकर्ता को भेजता है। किसी भी नेटवर्क के पाँच मूल अंग है:
  • टर्मिनल: टर्मिनल मुख्य रूप से वीडियो टर्मिनल एवं वर्कस्टेशनो का समावेश होता है। इन पुट एवं आउट पुट उपकरण नेटवर्क मे डेटा भेजने एवं प्राप्त करने का कार्य करते है. उदाहरणः माइक्रोकम्प्यूटर, टेलीफोन, फेक्स मशीन आदि. 
  • दूरसंचार प्रोसेसर: दूरसंचार प्रोसेसर वे टर्मिनल और कम्प्यूटर के बीच रहते है। ये डाटा भेजने एवं प्राप्त करने के सहायता करते है। मोडेम मल्टीप्लेक्सर, फ्रन्ट एण्ड प्रोसेसर जैसे उपकरण नेटवर्क मे होने वाली विविध क्रियाओ और नियंत्रणो मे सहायता करता है। 
  • दूरसंचार चैनल एवं माध्यम: वे माध्यम जिनके उपर डाटा प्रेषित एवं प्राप्त किया जाता है उसे दूरसंचार चैनल कहते है। दूरसंचार नेटवर्क के विभिन्न अंगो को जोडने के लिए माध्यम का उपयोग करते है। 
  • कम्प्यूटर: नेटवर्क सभी प्रकार के कम्प्यूटर को आपस मे जोडता है। जिससे वे उसकी सूचना पर प्रक्रिया कर सके। 
  • दूरसंचार साफ्टवेयर: दूरसंचार साफ्टवेयर एक प्रोग्राम है जोकि होस्ट कम्प्यूटर पद्धति पर आधारित है। यह कम्प्यूटर पद्धति दूरसंचार विधियो को नियंत्रित करता है और नेटवर्क की क्रियाऔ को व्यवस्थित करता है.
आभारी टी डी आई एल.

5 comments:

  1. सुंदर पोस्ट

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  2. वाह ! हिन्दी में इतना अच्छा विवरण पढ़कर मजा आ गया। ऐसा बहुत उपयोगी है।लिखते रहिये।

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  3. bahut badhiya lagi jankari, bahut hee umda praya hai

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  4. sir thank you very much.
    hindi me jankari bahut hi kam milti hai.

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  5. bhut hi accha prayas hai kisi bhi topic ke bare me jaldi hi jankari mil jati hai.........

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