Jun 21, 2010

कम्प्यूटर का रोचक सफर

कम्प्यूटर की विकास यात्रा बड़ी ही रोचक है। असल में आज आप जैसा कम्प्यूटर देखते हैं उसके पीछे कई ऐतिहासिक किस्से छिपे हैं। यह साल-दर-साल अपने स्वरूप व कार्यों में परिवर्तन करता आया है। प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर ने इसे हर क्षेत्र के लिए उपयोगी बना दिया है। यहां हम आपको रूबरू करा रहे हैं, कम्प्यूटर की उस रोचक विकास यात्रा से जिससे होते हुये लगभग कमरे के आकार का कम्प्यूटर, हथेलियों पर रखने लायक स्थिति तक पहुँच गया है।

कम्प्यूटर के पितामह कहे जाने वाले चार्ल्स बेबेज जब एक ऐसी मषीन बनाने में असफल हो गए जो गणितीय गणनाएं कर सके तो उन्हें ब्रिटिश सरकार ने पैसा देने से इंकार कर दिया। यह एक बहुत बड़ी वजह रही जिससे कि इंग्लैंड में कम्प्यूटर क्रांति की शुरुआत 1822 में नही हो सकी थी। बबेज ने एक ऐसा कम्प्यूटर बनाया था, जिसका प्रारूप हाल में ही तैयार हो सका है और वह उन्ही के डिजाइनों पर आधारित है।
  • इनियाक कंप्यूटर: यह कम्प्यूटर प्रति सेकेंड 357 एप्लीकेशन के प्रोग्राम कर सकने में सक्षम था। 1946 में इसके आविष्कार के बाद लोगों को यह अंदाज लग पाया कि कम्प्यूटर क्या कर सकने में सक्षम है। हालांकि इस कम्प्यूटर का वजन तीस टन था, और इसमें 17,478 वक्यूम ट्यूब लगी हुई थी और यह 150 किलोवाट ऊर्जा की खपत करता था। इसमें प्रोग्रामिंग करने के लिए पैच केबल्स और स्विच की आवश्यकता होती थी। 
  • आई.बी.एम. ३६० कंप्यूटर: इस कम्प्यूटर की प्रसिद्धि ने ही आधुनिक कम्प्यूर जगत को आर्थिक आधार दिया था। 7 अप्रैल, 1964 में आईबीएम ने इस कम्प्यूटर के आविष्कार की घोषणा की थी। इसमें कई कलपुर्जे लगे थे और इसके समांतर मॉडल्स का मूल्य भिन्न था। इस कम्प्यूटर का डिजाइन कम्प्यूर के इतिहास में सबसे ज्यादा मषहूर माना जाता है। 
  • डाटा पॉइंट २२००: डाटा प्वाइंट 2200 की घोषणा 1970 में कम्प्यूटर टर्मिनल कॉर्पोरेषन ने की थी। इस कम्प्यूर को जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए मषीन प्रोसेसर को एक सिंगल चिप से बदल दिया गया था। इस कम्प्यूटर में मोडेम लगा सकने की सुविधा थी, साथ ही इसमें डाटा स्टोरेज के लिए हार्ड ड्राइव भी लगा दी गई थी। 
  • ज़ेरोक्स पार्क अल्टो: इस कम्प्यूटर में कर्सर को नियंत्रित करने के लिए माउस लगा हुआ था तथा इस कम्प्यूटर में आप विंडो और आइकन्स देख सकते थे। साथ ही इसमें ईथरनेट की सुविधा भी उपलब्ध थी। इतने सारे फीचर्स पहली बार किसी कम्प्यूटर में एक साथ आए थे। इस मषीन का निर्माण जेरॉक्स पालो ऑल्टो रिसर्च सेंटर ने 1974 में किया था। लेकिन दुर्भाग्य की बात ये थी कि जेरॉक्स उस दौरान इस कम्प्यूटर की लोगों में पहचान बनाने में नाकामयाब रहे थे। 
  • टी.आर.एस ८०: यह कम्प्यूटर 1977 में आया था। इस कम्प्यूटर में क्यूडब्ल्यूईआरटीवाई की-बोर्ड था। इसका आकार छोटा था और यह बेसिक प्रोग्रामिंग लेंग्वेज कर सकने में सक्षम था। साथ ही इस कम्प्यूटर के साथ मॉनीटर भी उपलब्ध था। इस कम्प्यूटर की शुरुआती कीमत 600 डॉलर थी। 
  • एप्पल २: इस कम्प्यूटर को 1977 में एप्पल ने निर्मित किया था। बाजार में यह कम्प्यूटर 15 वर्ष़ों तक रहा। यह बाजार में लांच हुआ पहला होम कम्प्यूटर था, साथ ही सबसे ज्यादा मषहूर भी। कलर ग्राफिक्स के इस्तेमाल ने इस कम्प्यूटर को एजुकेशन मार्केट में खासी सफलता दिलाई थी। 
  • आई.बी.एम. रोड रनर: सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर का खिताब ज्यादा देर संभाले रहना आसान नही था। लेकिन यह कम्प्यूटर सबसे तेज की दौड़ में पहली ऐसी मषीन साबित हुआ जो प्रति सेकेंड एक क्वाडिर्लियन तक गणनाएं करने में सक्षम था। आकार में यह 1946 में बने इनियाक कम्प्यूटर से भी बड़ा है। लेकिन वह दिन दूर नही जब आमतौर पर डेस्कटॉप कम्प्यूटर भी ऐसी गणनाएं करने में सक्षम होंगे।  
  • आई.बी.एम. पीसी: 1981 में आए इस कम्प्यूटर की स्पीड तेज थी और आकार में यह पतला था। लेकिन इसने मार्केट में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में मानक स्थापित किए थे जिनकी वृद्धि पर प्रतिस्पर्धा के कारण पहले रोक लग गई थी। इस पर्सनल कम्प्यूटर के बाद जिस तरह के सॉफ्टवेयर और अन्य पुर्ज़ों का निर्माण शुरू हुआ उसने आज इस्तेमाल हो रहे पर्सनल कम्प्यूटर संबंधी सिस्टम की जमीन तैयार की। वर्ष 1984 में इस कम्प्यूर के आने के बाद से पर्सनल कम्प्यूटर के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आए। इसमें एमएस डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम और तकरीबन सभी अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम्स के विपरीत कमांड लाइन इंटरफेस का इस्तेमाल किया गया था। व्यवसायिक तौर पर भी यह सफल रहा।
इसके बाद भी कम्प्यूटर के कई मॉडल्स मार्केट में आए जो कई गणनायें एक साथ एक बार में कई गुना तेजी से करने में सक्षम थे तथा कम्प्यूटर की यह विकास यात्रा कमरे के आकार से होते हुये अब पॉमटाप पर पहुँच गई है, जबकि भविष्य में इस यात्रा को आगे बढ़ते हुये, नैनो कम्प्यूटर तक पहुँचने के लिये वैज्ञानिक प्रयासरत हैं।
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