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Tuesday, September 21, 2010

इंटरनेट

29 अक्टूबर 1969 का दिन सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नव प्रांति का दिन था जब पहली बार कैलिफोर्निया के रिसर्च ग्रुप ने आर्पानेट के माध्यम से पहला इंटरनेट मैसेज भेजा था। इस पहली सफलता के बाद तो जैसे विश्व में नये युग की शुरूआत हो गई। इसके बाद इंटरनेट के धीरे-धीरे हुये प्रमिक विकास ने सारी दुनिया का नक्शा ही बदल दिया। आज हालत यह है कि इंटरनेट की वजह से ही यह कहा जाने लगा है कि हम एक `ग्लोबल विलेज' में रहते हैं। जहाँ हजारों कि.मी. दूर बैठे व्यक्ति भी एक दूसरे से हमेशा संपर्क में बने रहते हैं। भारत में इंटरनेट की व्यावसायिक शुरूआत 15 अगस्त 1995 को विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, जिसकी सेवायें शुरूआती दौर में महानगरों में दी गई। लेकिन जल्द ही इसकी लोकप्रियता देश के अन्य राज्यों से होते हुये कस्बों तक फैल गई। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इंटरनेट ने नये आयाम स्थापित किये। सभी क्षेत्रों में भारत की विकास यात्रा को सफल बनाने में इंटरनेट ने अभूतपूर्व योगदान दिया है। अब 15 अगस्त 2010 को जब भारत में इंटरनेट को आये 15 साल पूरे हो गये हैं। तब इसकी दीवानगी का आलम यह है कि करीब 81 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपभोक्ता इसका दैनिक जीवन में उपयोग कर रहे हैं। यह संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। विशेषज्ञों का मत है कि भारत में अभी भी इंटरनेट शैशवास्था में ही है जो भविष्य में अपनी सफलता के कई नये आयाम स्थापित करेगा।

भारत में इंटरनेट शब्द सन् 1994 के दौरान ही प्रचलन में आया। सबसे पहले भारत में इंटरनेट की सुविधा कुछ समय तक एजुकेशन एंड रिसर्च नेटवर्क द्वारा उपलब्ध करवाई गई थी परंतु अगस्त 1995 से व्यावसायिक प्रयोग के लिए यह सुविधा विदेश संचार निगम लिमिटेड (वी.एस.एन.एल.) द्वारा उपलब्ध करवाई जाने लगी। फलत मात्र राजधानी दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों के 32,000 लोग इस सुविधा का लाभ उठाने लगे। अगस्त 1995 से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चैन्नई महानगरों से प्रारंभ की गई& इंटरनेट सुविधा से बैंगलौर, पुणे, कानपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुर, हैदराबाद, पटना तथा गोवा भी इससे जुड़ गए। आज हजा& का विजाय है कि इंटरनेट के बढ़ते जाल के कारण सम्पूर्ण भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से वफद्धि हो रही है, यहाँ तक कि गाँव-गाँव में जहाँ भरोसेमंद मीडिया उपलब्ध है, इंटरनेट का उपयोग किया जा रहा है।

आरंभ में इंटरनेट सुविधा के विस्तार के लिए वी.एस.एन.एल. दूरसंचार विभाग का सहयोग ले रहा था, ताकि अधिकाधिक उपभोक्ताओं को सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। तब सभी नए नोड दूरसंचार विभाग द्वारा ही संचालित किए जा रहे थे। वी.एस.एन.एल. की जी.आई.ए.एस. (गेटवे इंटरनेट एक्सेस सर्विस) विश्व की न्यूनतम दरों पर इंटरनेट की सम्पूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराती थी। वी.एस.एन.एल. ने इंटरनेट की सम्पूर्ण सेवाएं पूरे देश को उपलब्ध कराने के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना बनाई थी। इसके अन्तर्गत इसका मुख्य इंटरनेट एक्सेस नोड मुंबई मेंस्थापित किया गया जिसका संपर्क अमेरिका के इंटरनेट नोड से उपग्रह के माध्यम से तथा यूरोप के इंटरनेट नोड से समुद्र के अंदर बिछाए गए केबलों के माध्यम से किया गया।

आज इंटरनेट भारत मेंअत्यधिकलोकप्रियता प्राप्त कर चुका है। इंटरनेट ने भारतीय कंपनियों के लिए नई-नई सेवाओं के साथ असीमित अवसर प्रदान करके नए युग की शुरुआत की है। अभीतक इसमें ई-मेल, डाटा बेस, वेब होस्टिंग सेवाएँ, विज्ञापन, इंटरनेट प्रकाशन तथा इंटरनेट कारोबार शामिल है। आज कई भारतीय समाचार पत्रों, मंत्रालयों, कार्यालयों एवं संस्थाओं आदि ने अपनी अपनी वेबसाइटें खोली हैं, जिनके द्वारा समाचार पत्रों को इंटरनेट पर भी पढ़ा जा सकता है तथा मंत्रालयों एवं कार्यालयों के बारे में विस्तफत जानकारी उनकी वेबसाइटों द्वारा इंटरनेट पर ही ली जा सकती है। इंटरनेट के आगमन से हमारे देश में सूचना क्रांति के नए युग का सूत्रपात हुआ और इसकी तीव्रगति से अभिवफद्धि हुई है। सन् 1998 में इंटरनेट को घर-घर तक पहुँचाने के लिये नेशनल इंफार्मेटिक पॉलिसी बनाई गई थी। आज भारत में इंटरनेट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटरनेट उपभोक्ताओं के मामलों में विश्व में भारत का तीसरा स्थान है। भारत में लगभग 81 मिलियन लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं तथा 8 मिलियन से भी अधिक ब्रॉडबैंड कनेक्शन भारत में है.

फिनलैंड ने तमाम देशों से कम से कम एक मामले में तो बाजी मार ही ली और वह है इंटरनेट कनेक्शन को मूलभूत अधिकार बनाने का। फिनलैंड ने ब्राडबैंड सर्विस पाने को कानूनी अधिकार बनाकर इसके लिये वहाँ काम कर रही सभी 26 टेलीकॉम कंपनियों को भी सतर्क रहने को कहा है। फिनलैंड अब एकमात्र ऐसा देश है जहाँ हर व्यक्ति को 1 एमबीपीस (मेगाबाइट पर सेकंड) की डाउनलोड स्पीड देना हर प्रदाता कंपनी के लिए कानूनी तौर पर जरूरी होगा। फिनलैंड की मिनिस्टर ऑफ कम्युनिकेशन सुवि लिंडेन का कहना है कि हमने काम कर रहे सभी 26 इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भी इस बारे में बता दिया है कि अब हमारे देश में ब्रॉडबैंड कनेक्शन बेसिक राइट्स में शामिल है और उन्हें इसी के अनुरूप काम करना होगा। वैसे कमाल की बात यह भी है 53 लाख से ज्यादा की आबादी वाले इस देश में 99 प्रतिशत घरों में 1 एमबीपीएस की गति से इंटरनेट कनेक्शन पहले ही उपलब्ध है और इस कायदे के आने के बाद तुंत ही बाकी लोगों को भी यह सुविधा होगी। पिछले ही साल यहाँ कम्युनिकेशन मार्केट एक्ट में बदलाव कर लोगों को पोस्टल और फोन सुविधाओं की ही तरह नेट सुविधा भी देने का प्रण किया गया था। सुवि लिंडेन का कहना है कि हाई-क्वालिटी और उचित दर वाला ब्रॉडबैंड कनेक्शन हमारे हर नागरिक का मूलभूत अधिकार होना ही चाहिये। कम्युनिकेशन नेटवर्क्स यूनिट देख रहीं ओली-पेक्का रेंटाला का कहना है कि जहॉं एक एमबीपीएस की स्पीड के लिये कई देश जद्दोजहद कर रहे हैं तब हमारा इसे अधिकार के रूप में शामिल करना वाकई खुशी की बात है।

इंटरनेटः भारत पहॅचने तक की विकास यात्रा
  • १९६२ से १९६९: यही वह काल था जिसमें कि इंटरनेट की परिकल्पना की गई तथा इंटरनेट कागजी परिकल्पना से निकलकर एक छोटे से नेटवर्क के रुप में सामने आया।
  • १९६२: पॉल बैरन, रैण्ड कारपोरेशन ने पैकेट स्विच तकनीक पर आधारित कम्प्यूटर नेटवर्क की परिकल्पना की।
  • १९६७: एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंट (ARPA) ने, जो कि एक सैन्य संगठन था, ने ARPANET बनाने के संबंध में विचार-विमर्श आरम्भ किया।
  • १९६९: ARPANET का निर्माण किया गया, जिसके अंतर्गत अमेरिका के चार संस्थानों- स्टेनफोर्ड रिसर्च संस्थान, UCLAUC, SANTA BARBARA तथा उटा (UTAH) विश्वविद्यालयों में स्थित एक-एक कम्प्यूटर को जोड़कर 4 कम्प्यूटरों का नेटवर्क बनाया गया।
  • १९७० से १९७३: ARPANET परियोजना को आरम्भ से ही सफलताएं मिलती गई। वैसे तो इसके निर्माण का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों के मध्य डाटा आदान-प्रदान व रिमोट कम्प्यूटिंग था लेकिन E-MAIL सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला माध्यम बन गया।
  • १९७१: ARPANET से अब 23 कम्प्यूटर जुड़ गये थे। ये कम्प्यूटर अमेरिका के विश्वविद्यालयों व रिसर्च संस्थानों में स्थापित थे।
  • १९७२: इंटरनेट वर्किंग ग्रुप (INWG) बढ़ते नेटवर्क के लिये मानक (STANDARD) बनाने के लिये बनाया गया। इसका प्रथम अध्यक्ष विंटन सर्फ (VINTONCERF) को बनाया गया जिन्हें कि आगे जाकर इंटरनेट का पितामह (Father of Internet) कहा गया।
  • १९७३: अमेरिका से बाहर लंदन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज तथा नार्वे स्थित रॉयल रडार संस्थान के कम्प्यूटर ARPANET से जोड़े गये।
  • १९७४ से १९८१: ARPANET ं सैन्य रिसर्च से बाहर आया तथा सामान्य लोगों को इसी अवधि में यह पता लगा कि कम्प्यूटर नेटवर्क का आम जीवन में किस प्रकार का उपयोग संभव है।
  • १९७४: TELNET का विकास हुआ तथा ARPANET का वाणिज्यिक उपयोग संभव हुआ।
  • १९७५: स्टोर एवं फारवर्ड (Store & Forword) प्रकार के नेटवर्क बनाए गये व ब्रिटेन की महारानी एलीजाबेथ ने पहली बार E-MAIL भेजा।
  • १९७६: UUCP (Unix to Unix copy), AT & T तथा बेल लेबोरेटरी द्वारा विकसित किया गया जिसे कि बाद में यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ बेचा गया।
  • १९७७: UUCP का उपयोग करते THEORYNET बनाया गया जिसके द्वारा 100 से अधिक रिसर्च कार्य में लगे वैज्ञानिकों को E-MAIL की सुविधा उपलब्ध करायी गई।
  • १९७९: ड्यूक विश्वविद्यालय के टॉम ट्रसकॉट व जिम एलिस तथा नार्थ कैलिर्फोनिया विश्वविद्यालय के स्टीव वैलोविन ने प्रथम USENET न्यूज ग्रुप बनाया । इस न्यूज गुप्र में कोई भी भाग लेकर धर्म, राजनीति, विज्ञान तथा अन्य किसी भी विषय के संबंध में आपस में चर्चा कर सकते थे।
  • १९८१: ARPANET के 213 HOST कम्प्यूटर हो गये थे तथा औसतन लगभग 20 दिनों बाद एक HOST कम्प्यूटर जुड़ने लगा। BITNET (BECAUSE ITS TIME NETWORK) का विकास हुआ। CSNET (COMPUTER SCIENCE NETWORK) बनाया गया। फ्रेंच टेलीकॉम द्वारा पूरे फॉस के लिये MINITEL नाम से नेटवर्क स्थापित किया गया।
  • १९८२ - १९८७: इसी अवधि में इंटरनेट शब्द का प्रयोग ARPANET के स्थान पर हुआ तथा बॉबकॉन तथा विंटन सर्फ ने इंटरनेट से जुड़े समस्त कम्प्यूटरों के लिए एक समान प्रोटोकॉल का विकास किया, जिससे कम्प्यूटर सरलता से सूचना का आदान-प्रदान कर सकें। लगभग इसी समय पर्सनल कम्प्यूटर व अन्य सस्ते कम्प्यूटरों का विकास हुआ, जिसके फलस्वरुप इंटरनेट का अधिक तेजी से विकास हुआ।
  • १९८२: समस्त इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक समान (Common) प्रोटोकॉल TCP/IP (TRANSMISSION CONTROL PROTOCOL/INTERNET PROTOCOL) का विकास हुआ। ''इंटरनेट`` नाम पहली बार प्रयुक्त किया गया।
  • १९८३: ARPANET दो भागों में MILNET (MILATORY NETWORK) तथा ARPANET में विभक्त किया गया। टॉम जेंनिग्स द्वारा FIDONET का विकास किया गया.
  • १९८४: डोमेन नेम सर्वर (DOMAIN NAME SERVER) प्रणाली का विकास किया गया। JUNET (JAPAN UNIX NETWORK), UUCP का उपयोग करते हुये बनाया गया। इंटरनेट के HOST कम्प्यूटरों की संख्या 1000 से ज्यादा हो गई।  पहली बार साइबर स्पेस (CYBER SPACE) का नाम इंटरनेट को दिया गया।
  • १९८६: NSFNET व FREENET का विकास हुआ।
  • १९८७: इंटरनेट HOST कम्प्यूटरों की संख्या 10,000 से अधिक हो गई, UUNET निर्मित किया गया। जिससे कि UUCP व USENET का वाणिज्यिक उपयोग आरम्भ हुआ।
  • १९८८ से १९९०: इस अवधि में एक संचार माध्यम के रुप में इंटरनेट को माना जाने लगा। साथ ही सूचना के सुरक्षित आदान-प्रदान व कम्प्यूटर सुरक्षा पर भी उपयोगकर्ताओं ने ध्यान देना आरम्भ किया। क्योंकि इसी अवधि में एक कम्प्यूटर प्रोग्राम 'INTERNET WORM` ने इंटरनेट से जुड़े लगभग 6000 कम्प्यूटरों को अस्थाई रुप से अनुपयोगी बना दिया था।
  • १९८८: INTERNET WORM नामक कम्प्यूटर प्रोग्राम ने इंटरनेट से जुड़े 60,000 कम्प्यूटरों में से 6000 को अस्थाई रुप से अक्रिय बना दिया। कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम, कम्प्यूटर नेटवर्क सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुये बनाई गई. 
  • १९८९: इंटरनेट से जुड़े कम्प्यूटरों की संख्या 1,00,000 से ऊपर हो गई। BITNET तथा CSNET को मिलाकर कॉरपोरेशन फॉर रिसर्च एंड एजुकेशन नेटवा\कग (Corporation for Research & Education Networking) बनाया गया।
  • १९९०: ARPANET को समाप्त कर दिया गया तथा नेटवर्क ऑफ नेटवर्कस् के रुप में इंटरनेट शेष रहा, जिसके कि HOST कम्प्यूटरों की संख्या 3,00,000 हो गई। पीटर डयूश, एलन एक्टेज व बिल हीलन ने ARCHIE को जारी किया, जिससे कि इंटरनेट के कम्प्यूटरों पर उपलब्ध सामग्री को आसानी से प्राप्त किया जाने लगा।
  • १९९१ से १९९३: यही वह अवधि थी जिसमें कि इंटरनेट ने सर्वाधिक उं@ढचाइयों को छुआ। इंटरनेट का वाणिज्यिक उपयोग काफी बढ़ गया।
  • १९९१: GOPHER को पॉल लिंडर व मार्क मैकहिल ने विकसित कर जारी किया। वाइड ऐरिया इनफॉरमेशन सर्वर (WAIS) का विकास हुआ। इंटरनेट पर प्रतिमाह डाटा आदान-प्रदान की मात्रा ट्रीलीयन बाइट से भी अधिक हो गई।
  • १९९२: इंटरनेट पर ऑडियो व वीडियो को भी भेजा जाना संभव हुआ। इंटरनेट सोसायटी (ISOC) की स्थापना हुई। वर्ल्ड वाईड वेब (WWW) को टिम व बर्नस ली ने विकसित किया। 1,000,000 से अधिक HOST कम्प्यूटर इंटरनेट से जुड़ गये।
  • १९९३: MOSAIC नामक पहला ग्राफिक आधारित वेब ब्राउसर विकसित किया गया। INTERNIC का गठन, इंटरनेट संबंधित सर्विस को एकरुपता प्रदान करने व उनका प्रबंधन करने के उद्देश्य से किया गया। इंटरनेट पर डाटा ट्रेफिक 341,634% की दर से बढ़ गया।
  • १९९४ से १९९८: लगभग 40 मिलियन उपयोगकर्ता इंटरनेट से जुड़ गये तथा इंटरनेट युग का सूत्रपात इसी अवधि में हुआ।
  • १९९४: इंटरनेट शॉपिंग का आरम्भ हुआ। विज्ञापन दाताओं ने इंटरनेट पर विज्ञापन देने आरम्भ किये।
  • १९९५: NSFNET पुन: रिसर्च कार्यों तक सीमित हो गया। सन् माइक्रोसिस्टम ने इंटरनेट प्रोग्रामिंग भाषा JAVA का विकास किया।
  • १९९६: इंटरनेट से जुड़े कम्प्यूटरों की संख्या 10 मिलियन से अधिक हो गई। 150 से अधिक देशों के कम्प्यूटर इंटरनेट से जुड़ गए।
  • १९९७: इंटरनेट ने आम आदमियों के बीच अपनी पहचान बना ली तथा इसके बिना जिन्दगी अधूरी सी प्रतीत होने लगी।
  • १९९८: भारत में प्रत्येक स्थान पर इंटरनेट को पहुंचानें के प्रयास आरम्भ हुये और नेशनल इनफरमेटिक्स पॉलिसी बनाई गई।
  • १९९९ से २००९: भारत में नागरिकों को इंटरनेट के माध्यम से नागरिक सुविधायें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इंटरनेट को दूर दराज के गॉंवों तक पहुंचाया गया। अनेक ई-गर्वेनेंस परियोजनाऍं बनाई गईं व लागू की गईं।
भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में आई.टी. क्षेत्र ने बिट-बिट करते-करते बड़ा बाईट ले लिया है। आज भारत विश्व के उन गिने-चुने देशों की गिनती में आ खड़ा हुआ है जिसने इतने कम समय में दुनिया में इतनी उन्नति की है। अजीम प्रेमजी, जो दुनिया के सबसे धनी लोगों में से एक है तथा विप्रो कंपनी के अध्यक्ष है, ने कहा है, "विश्व में हमने अपनी इमेज बदली है। भारत जो हाथियों व सांपों को रिझाने वाली भूमि थी आज विश्व में उसे सूचना प्रौद्योगिकी के अभियन्ताओं का देश कहा जाता है''। इसमें संदेह नहीं है कि आने वाले वर्षों में भारत का कायाकल्प हो जायेगा। आज विश्व में विकसित देशों का दम्भ भरने वाले देश भारत के आई.टी. इंजीनियर्स का मुंह ताकते ऩजर आते हैं।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द द्वारा संपूर्ण राष्ट्र को वीडियो कांफ्रेंसिंग से जोड़ना, डेयरी डेवलपमेंट कार्यप्रम, लैंड कम्प्यूटराईजेशन, लोक शिकायतें, टच स्प्रीन सुविधा से ग्रामीणों को मनचाही सूचना मिल जाना, ई-गवर्नेन्स, चुनावों में सूचना संप्रेषण, मौसम विवरण, पर्यटकों के लिये हेल्पलाइन, रोजमर्रा की घटनायें, परीक्षा परिणाम, हस्तशिल्प हथकरघा उत्पादन, जनगणना के आंक़ड़े, जमीन के रिकार्ड, भौगोलिक परिदृश्य, जनसांख्यिकी इतिहास व साक्ष्य अनुसंधान, डिजाईन व विकास, राष्ट्रीय धरोहर, कोर्ट केसेज आदि सूचनाओं की सुलभता से भारत के विकास को गति व विश्व को एक दिशा मिली है।

भारत की संपूर्ण साक्षरता दर लगातार बढ़ती जा रही है। इस गति से 2015 तक 90 प्रतिशत लोग साक्षर हो चुके होंगे। इस अनुमान से सूचना प्रौद्योगिकी देश की बढ़ती बेरोजगारी को रोकने के लिये वरदान साबित होगी। भारत के पास मानव संपदा की कोई कमी नहीं है और अब तो साक्षर और कम्प्यूटर साक्षर संपदा भी बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष भारत की गरीबी 1 प्रतिशत की दर से घट रही है जो 2015 तक लगभग 5 प्रतिशत और कम हो जायेगी।

केरल भारत का सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य है। उसका एक छोटा सा गांव मालापुरम हिन्दुस्तान का प्रथम नागरिक प्रायोजित ई-लिटरेट गांव घोषित हुआ था। उत्तरप्रदेश में सामान्य गृहणियां ई-मेसेज द्वारा अपने दूर-दराज में रहने वाले पतियों क संबंधियों को सूचना संप्रेषण के लिये सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने लगी है जिससे समय व धन की बरबादी रूकी है एवं मन का बोझ हल्का हुआ है। वेब केम एवं वीडियो कांफ्रेंसिंग ने दुनिया को मानो मुट्ठी में ले लिया है। आंध्रप्रदेश ने थोड़े समय में जो आशातीत प्रगति की है वह सब सूचना प्रौद्योगिकी की ही देन है। सिक्किम जैसे दूर-दराज के पहाड़ी राज्य में जनजातीय महिलायें कम्प्यूटर ट्रेनिंग ले रही हैं। संदर्भित समंक बताते हैं कि इससे जनजाति लोगों में स्व-विश्वास की भावना एवं रोजगार की संभावना बढ़ेगी। बारामति जो मुंबई (भारत की वाणिज्यक राजधानी) से 270 किमी दूर है, वहाँ के दुग्ध उत्पादक संघों ने सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर विश्व में अपने स्तर का कम्प्यूटरीकृत दुग्ध संकलन केन्द स्थापित किया है जिसे लोग स्थानीय भाषा में ``बड़े शीतलक यंत्र'' कहते हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर के निकट नायला गांव में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को दिखाया गया है कि कैसे ग्रामीण गुजरियाँ स्वयं के बूते सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर दुग्ध संकलन, प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग करती है। बिल क्लिंटन इस कृत्य को देखकर खुशी मिश्रित आश्चर्य से उनके साथ झूम उठे थे। विडियो कांफ्रेसिंग, टच स्प्रीन फेसिलिटी, बैंकिंग सुविधा, एटीएम मशीन व ग्रामीण ई-चौपाल से भारत के गांव लगातार जुड़ते जा रहे हैं।

मोबाइल आधारित इंटरनेट सुविधा ने इसे और सुविधाजनक बना दिया है। अब बहुत कम इन्फ्रास्ट्रक्चर के बावजूद अति उत्तम सूचना प्रौद्योगिकी सुविधायें तुरन्त हासिल की जा सकती हैं। मैसाच्यूट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के डायरेक्टर श्री केनीथ केनिस्टन ने कहा है कि ``भारत वास्तविक रूप से जमीनी स्तर पर परियोजना को पूर्ण करने में विश्व का नेतृत्व करता है।'' वस्तुत आर्थिक विकास, नैतिकता एवं सामाजिक उत्थान के लिये हमें एक जुट होकर सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग इसी तरह करते रहना होगा ताकि जनकल्याण के लिये यह वरदान साबित हो।
आभारी इलेक्ट्रानिकी आपके लिए 

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