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Wednesday, November 24, 2010

क्या आपने सुदर्शन भाटिया कृत "महाभारत कथा" पढी? अगर नहीं तो आप भाग्यशाली हैं !

जीवन में कब क्या हो जाए कुछ पता नहीं चलता. ऐसे ही मैं आज थोड़ी देर के लिए दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, जनकपुरी चला गया. वहां मैंने एक किताब देखी: "महाभारत कथा" जो की श्री सुदर्शन भाटिया द्वारा लिखी गयी थी.

पहले मैं आपको एक बात बता दूं की मैं महाभारत का दीवाना हूँ. महाभारत पर लिखी कोई भी किताब मैं पढ़ सकता हूँ और काफी सारी किताबें मैंने पढ़ी हुई है. आज भी जब मैं कोई भी महाभारत की किताब देखता हूँ तो उसे जरुर पढने की कोशिश करता हूँ. वैसे आदतें कभी कभी भारी पड़ जाती हैं. कुछ ऐसा ही आज मेरे साथ हुआ.

किताब का पहला पृष्ठ पढ़ते ही मुझे लग गया की कुछ गलत हो रहा है. मैं क्षमा चाहता हूँ, मुझे श्री सुदर्शन भाटिया के बारे में कुछ पता नहीं है लेकिन मैं एक बात कहना चाहूँगा की आपना दैनिक भड़ास महाभारत जैसे महान ग्रन्थ पर न निकालें. मुझे पता नहीं की श्री भाटिया का क्या दृष्टिकोण है लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से उनका लेखन पसंद नहीं आया. मैं कहना चाहूँगा की कई जगह पर ये फूहड़ है.

बहुत कोशिश की कि इन्टरनेट पर श्री भाटिया के बारे में कोई जानकारी मिले या उनका इमेल पता मिले ताकि मैं उन्हें इन सब चीजों से अवगत करा सकूँ, पर मैं असफल रहा और इस लिए इस पोस्ट को लिखने की जरुरत पड़ गयी. अगर किसी पाठक का विचार मुझसे भिन्न है और उन्हें मैंने किसी भी तरह से आहात किया हो तो पहले ही माफ़ी माँगना चाहूँगा. वैसे उन लोगों से एक आग्रह है कि कृपया इस पुस्तक को पढ़ कर फिर मुझे अपनी राय दें. मुझे विश्वास है कि आपका विचार भी मेरे विचारों से मेल खाएगा. अगर इससे पहले आप श्री राज गोपालाचारी कृत "महाभारत कथा" पढ़े तो लेखन के स्तर का अंतर स्पष्ट हो जाएगा.

1 comment:

  1. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं ...
    जिनके लिये सहन कर लिया जाता है...

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