Jan 8, 2011

मंहगाई सचमुच बढ़ गई है

वाकई, महंगाई सचमुच बढ़ गई है. न न कोई अटकलें मत लगाइयेगा क्यों की मैं आंटे दाल की बात नहीं कर रहा हूँ. दरअसल बात ये है की आज मुझे IPL मंडी के बारे में पता चला जहाँ क्रिकेटरों की ऊंची बोली लगाईं गई. कितनी ऊंची? अभी तक तो कई खिलाडियों की कीमत १० करोड़ तक जा पहुंची है लेकिन कई महान खिलाडी जैसे सचिन, धोनी, सहवाग वैगेरह अभी बांकी है. भाई बात भी सही है आखिर इनका ब्रांड भी तो बड़ा है. ब्रांड का महत्व क्या है ये तो वे बिजनसमैन ही समझ सकते है जो बोली लगा रहे हैं.


आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि एक टीम अपने खिलाडियों कि खरीद के लिए ९ मिलियन (९००००००) डालर खर्च कर सकती है यानि कि करीबन ४५००००००० रूपये. मुझे पता है कि आपको शुन्य गिनने में काफी तकलीफ हो रही होगी लेकिन ये सही है, आप पैंतालिस करोड़ रूपये ही गिन रहे हैं. कुल दस टीमें खेल रही है यानि कि खिलाडियों कि कुल कीमत चार सौ पचास करोड़ रूपये. ये सिर्फ खिलाडियों की कीमत है. प्रयोजन का खर्च तो अभी जोड़ा ही नहीं है. अगर इसी पैसे को भारत के सारे राज्यों में बाँट दिया जाए तो हरेक राज्य के पास तकरीबन २०००००००० रूपये होंगे जो कि वो अपने विकास कार्य में लगा सकती है. जी हाँ वही पैसे जो सिर्फ ११० लोगों के विकास कार्य में खर्च हो रहे है.

आश्चर्य की बात है कि हम लोग २ रूपये की पेट्रोल वृद्धि पर बवाल मचा देते है लेकिन हमें ये सारी चीजें नहीं दिखती. आश्चर्य ये भी है कि ये पता रहते हुए कि ये करोड़ों रूपये हमारी अपनी मेहनत की कमाई के है, हमारे कान पर जू नहीं रेंगती. आश्चर्य ये भी है कि हम सब लोग अपनी बर्बादी पर दिल खोल कर तालियाँ बजाते हैं. और सबसे आश्चर्य की बात ये है की इतना सब जानने के बाद भी हमारी तालियों की गूँज कम नहीं होगी.
समय आ गया है की हम ये भेड़चाल छोड़ें और अपने देश और अपने परिवार के बारे में सोंचें. वर्ना उन लोगों का क्या है, वो वैसे ही बिकते रहेंगे, करोड़ों कमाते रहेंगे, हम पर हँसते रहेंगे और हम अपना खून जलाकर उन्हें पिलाते रहेंगे.

चलो IPL देखें, खुश हो, मजे करें, अगले साल उन्हें दुगना मालामाल करें और अपने आप को चार गुना बर्बाद. जय क्रिकेट.