Jul 14, 2012

अतृप्त इच्छाओं की कहानी - गोदान

मैं प्रेमचंद का बहुत बड़ा प्रसंशक हूँ. उनकी अधिकतर किताबें पढ़ी हैं और हर बार कुछ नया हीं अनुभव किया है. कल हीं मैंने उनकी प्रसिद्ध रचना गोदान खत्म की है और उसका असर अभी तक है. प्रेमचंद की अधिकतर कहानियों की तरह इसमें भी ग्रामीण जीवन का हीं चित्र खींचा गया है और हमेशा की तरह वह दिल को छूने वाला है. जीवन के हर रंग को इस उपन्यास में उकेरा गया है और सब कुछ इसमें समाहित है. त्याग, क्रोध, प्रेम, कलह, इच्छाएँ, संतुष्टि, अतृप्तता और न जाने क्या क्या.

इसमें दो कहानियां साथ साथ चलती हैं और दोनों एक दूसरे से बिलकुल विपरीत है. एक कहानी का केन्द्र गाँव है तो एक का शहर. जहाँ एक ओर किसी को खाने के लाले हैं वहीँ दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो प्रतिदिन हजारों उड़ाते हैं. सब कुछ होते हुए भी उनमे एक चीज सामान है और वो हैं अतृप्त इच्छाएँ. गरीबों की इच्छाओं का तो कोई अंत नहीं किन्तु जो धनवान हैं, वे भी संतुष्ट नहीं हैं. उनके पास धन है, दिखावा है, सारी सुख सुविधाए हैं किन्तु संतुष्टि वहाँ भी नहीं है.

होरी एक गरीब किसान है जो इतनी किल्लत से जी रहा है कि उसे दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती. कई महाजनों से उसने रूपये उधर लिए हैं किन्तु वर्षों से ब्याज चुकाने के बाद भी मूल ज्यों का त्यों बना हुआ है. स्वाभाव उसका इतना सीधा है कि कई जगह भीरु होने का एहसास दिलाता है किन्तु उसके मन में कोई कपट नहीं है. शुरू से अंत तक उनके जीवन में जो उतर चढाव आये हैं उसे प्रेमचंद ने बड़ी हीं खूबसूरती से व्यक्त किया है. जब जब लगता है कि शायद अब उसके जीवन में कुछ अच्छा होगा, कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी हो जाती है. कई बार इश्वर पर भी क्रोध आता है कि क्या ये प्राणी केवल एक सुख पाने के योग्य भी नहीं है? होरी पहली बार खुश तब होता है जब वो उधार पर एक गाय लेकर आता है लेकिन यहीं से उसकी वास्तविक परेशानी शुरू होती है. हद तब होती है जब उसका अपना बेटा भी समय के बहाव में बहकर उससे नाता तोड़ लेता है. जीवन भर किल्लत झेलने वाले होरी की मृत्यु भी दुखद है किन्तु उसके कष्टों का अंत होते देख एक संतोष भी होता है.

दूसरी ओर रईसों की पूरी टोली है और उपन्यास के इस भाग का आकर्षण मेहता और मालती की प्रेम कहानी है. विचित्र किन्तु रोमांचक. पहले मालती का मेहता की ओर आकर्षण और मेहता का उसे नादारंदाज करना, मालती का चरित्र परिवर्तन और फिर मेहता का उसकी ओर आकर्षण और मालती का उसे नादारंदाज करना. अंत में उनके बीच एक अनकहा और अनसुना सम्बन्ध स्थापित होना. सब कुछ दिल को छू जाने वाला है.

आज की गलाकाट महगाई में एक किसान को पांच पैसे के लिए तिल तिल मरते देखना दुखद है साथ हीं हम स्वयं उस युग में पहुँच जाते हैं जहाँ चीजें आज के हिसाब से कितनी सस्ती थीं. दिल में आता है कि काश अगर हम वहाँ होते तो उन सभी लोगों के लिए अपनी तिजोरियां खोल देते और सबकी परेशानियां दूर हो जाती. कुछ रुपयों में जमीन जायदाद खरीद लेना हमें अंदर तक गुदगुदा जाता है. जो व्यक्ति सरल जीवन शैली पसंद करता है उसके लिए ये पुस्तक एक तोहफे से कम नहीं है. ये आपको उस दौर में ले जाएगी जहाँ जाना हमेशा से आपका सपना रहा है. इसे पढ़ कर हीं कोई समझ सकता है कि इसे प्रेमचंद की कालजयी रचना क्यों कहा जाता है.