Aug 14, 2012

स्वयंवर - कुछ हीं दिनों में छपने को तैयार

पिछले कुछ महीनों से मैं अपना उपन्यास पूरा करने में लगा था. वैसे कभी मैंने ये नहीं सोचा था कि मैं भी कोई उपन्यास लिख सकता हूँ किन्तु मेरी बड़ी बहन तरंग को ये विश्वास था कि मैं ये काम कर सकता हूँ. वो खुद भी एक लेखिका हैं और शायद इसलिए उन्होंने मुझे इसके लिए प्रेरित किया. नई बात ये है कि मैंने अपना उपन्यास खत्म किया और उससे भी ज्यादा खुशी की बात ये है कि भारत के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक, डायमंड बुक्स उसे छापने को तैयार हो गया. उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक ये पुस्तक बाजार में आ जाएगी.

स्वयंवर भीष्म और अम्बा के संबंधों पर आधारित उपन्यास है. विषय चूँकि पौराणिक है, इसलिए महाभारत से सन्दर्भ लेना तो लाजिमी है लेकिन इसे मैंने पूरी तरह मौलिक बनाने का प्रयत्त्न किया है. अब इसमें मैं कितना सफल रहा हूँ, ये तो आपलोग इसे पढ़ने के बाद हीं बता सकते हैं.

इस उपन्यास में कुल बाईस (२२) अध्याय है और मैंने ये निश्चय किया है कि मैं हर दिन हर अध्याय का कुछ भाग आपलोगों के लिए अपने इस ब्लॉग में प्रकाशित करूँगा. आशा है कि जब ये सिलसिला खत्म होगा तो पुस्तक भी आप लोगों के सामने होगी. हाँ आपलोगों की प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है. आशा है कि वो मुझे मिलती रहेगी. आपसे अनुरोध है कि अगर आपको इसमें कुछ भी अच्छा लगे तो इसे अपने परिचितों को बनाने का कष्ट करें. अगर कोई सुझाव अथवा शिकायत हो तो अविलम्ब मुझे लिखें.

चलिए देखते हैं कि ये सिलसिला कैसा चलता है.