Aug 15, 2012

स्वयंवर - अध्याय एक

कहानी शुरू होती है काशी से जहाँ काशी नरेश अपनी पुत्री अम्बा का स्वयंवर रचाने के बारे में सोच रहे हैं. शताब्दियों से काशी ने किसी भी स्वयंवर का आयोजन नहीं किया है और किसी भी स्वयंवर को करने के लिए महाजनपदों की सम्मति आवश्यक है फिर भी काशी नरेश अपनी बात पर अड़े हैं. उनके आमात्य उन्हें समझाने का बड़ा प्रयत्त्न करते हैं किन्तु महाराज अपनी जिद पड़ अड़े हीं रहते हैं. आखिर उनके इस हठ का कारण क्या है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे.

“महाराज एक ऐसा निर्णय लेने जा रहे थे जिसका असर काशी पर वृहद रूप में होने वाला था. ये तो सत्य हीं था कि किसी भी राज्य और राजा का सम्मान स्वयंवर के पश्चात ज्यादा बढ़ जाता है किन्तु साथ हीं उनके शत्रुओं की संख्या भी बढ़ हीं जाती है.”

... इसी अध्याय से ...