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Sunday, August 19, 2012

स्वयंवर - अध्याय पांच

अगले दिन आमात्य हस्तिनापुर जाने के लिए तैयार हो रहे होते हैं कि राजकुमारी अम्बा उनसे मिलने आती है. उनसे मिलने के बाद अम्बा उनसे किसी भी प्रकार स्वयंवर रोकने का अनुरोध करती है. आमात्य के पूछने पर अम्बा जो कारण बताती है वो आमात्य को परेशान कर देता है. वो अम्बा को कहते हैं कि इस मामले में वे असमर्थ है किन्तु अम्बा के हठ के आगे वे उसकी मदद करने का वचन देते हैं. अम्बा आखिर ऐसा क्या बताती है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“अम्बा ने एक क्षण आमात्य को देखा और फिर नजरें नीची कर उनसे कहा "क्या आप क्रोधित है?” 

"आपपर क्रोधित होना मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है राजकुमारी.” 

अम्बा चौंक पड़ी. आमात्य फिर से उसे 'आप' और 'राजकुमारी' जैसे शब्दों से बुलाने लगे थे. वो काफी असहज हो गयी. उसे लगा जैसे जरुर कुछ अनुचित हो गया है. वो काफी दीन स्वर में बोली "मैं बहुत आशा लेकर आपके पास आई हूँ तात. आप फिर से 'आप' और 'राजकुमारी' जैसे शब्दों का प्रयोग कर मुझे लज्जित न करें.”

... इसी अध्याय से ...

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