Aug 21, 2012

स्वयंवर - अध्याय सात

अगले दिन आमात्य की भेंट बाह्लीक से होती है. वे उन्हें सब कुछ सच सच बताना चाहते हैं किन्तु उन्हें ऐसा अवसर नहीं मिलता. उसी दिन वे बाह्लीक से साथ हस्तिनापुर के लिए निकलते हैं. हस्तिनापुर पहुँचने के बाद अगले दिन उन्हें हस्तिनापुर राजसभा में सारी बातें स्पष्ट करनी होती है. आमात्य काफी परेशान हो जाते हैं कि वो कैसे वहाँ सारी बातें बताएँगे? हस्तिनापुर राजसभा में उनकी बाते सुनकर क्या प्रतिक्रिया होती है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“आमात्य को देखते हीं बहलीक तेजी से चलते हुए आमात्य तक आए. आमात्य उनका अभिवादन करने के लिए झुकने हीं वाले थे कि उन्होंने अनायास हीं आमात्य को बीच में हीं अपने आलिंगन में ले लिया. आमात्य को लगा जैसे उनकी हड्डियाँ चटख जाएंगी. उन्हें तुरंत हीं छोड़ते हुए बाह्लीक ने उनके कन्धों को पकड़ कर उच्च स्वर में कहा "हस्तिनापुर में आपका स्वागत है आमात्य.” 

... इसी अध्याय से ...