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Wednesday, August 22, 2012

स्वयंवर - अध्याय आठ

अगले दिन आमात्य हस्तिनापुर में भीष्म से मिलते हैं. वहाँ हस्तिनापुर राजसभा में वे सभी लोगों के सामने सारी बात रखने का प्रयत्त्न करते हैं किन्तु उन्हें ये जानकार आश्चर्य होता है कि ये सारी बातें भीष्म को पहले हीं पता होती है. सभी अपेक्षाओं के विपरीत, भीष्म आमात्य की बात मान लेते हैं जिससे स्वयं आमात्य को भी आश्चर्य होता है. आखिर आमात्य ने हस्तिनापुर राजसभा में क्या रहोस्योद्घाटन किया? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“अब हमें और लज्जित न करें गंगापुत्र. मुझे पता है कि आपको सारी जानकारी है. मैं इस बारे में कोई भी तर्क देने के स्थान पर आपसे क्षमा मांगना ज्यादा उचित समझता हूँ. कुछ व्यक्तिगत कारणों से यह त्रुटी तो हमसे हो गयी है. अब इसके लिए अगर आप हमें कोई दंड देना चाहते है तो वो भी हमें स्वीकार है.” 

... इसी अध्याय से ...

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