Aug 24, 2012

स्वयंवर - अध्याय दस

आमात्य हस्तिनापुर से अपने उद्येश्य में सफल होकर लौटते हैं जहाँ उनका भव्य स्वागत होता है. सभी ये जानना चाहते हैं कि हस्तिनापुर में क्या हुआ? आमात्य उन्हें सारी बातें बताते हैं. काशी नरेश स्वयंवर को उसी माह में कराने की घोषणा करते हैं. राजपुरोहित कहते हैं कि ये महीना इसके लिए शुभ नहीं है किन्तु काशी नरेश अपना निर्णय नहीं बदलते. उनके इस हठ पर वहाँ सभी लोग आश्चर्य प्रकट करते है और उनकी ये व्यग्रता किसी के समझ में नहीं आती है. आगे क्या होता है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“कुलगुरु को महाराज की अधीरता समझ में नहीं आई. उन्होंने एक बार राजपुरोहित की ओर देखा और फिर महाराज को संबोधित करके कहा "महाराज, हमें राजपुरोहित की बात नहीं टालनी चाहिए. आजतक इनके मुख से कोई असत्य वचन नहीं निकला है और इस बार भी ये ठीक हीं कह रहे हैं कि इस मास ग्रहदशा ठीक नहीं है. जहाँ हमने इतनी प्रतीक्षा की वहां एक मास और रुक जाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. इतना बड़ा आयोजन है, इसमें किसी भी प्रकार का कोई अनिष्ट नहीं होना चाहिए.” 

... इसी अध्याय से ...