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Saturday, August 25, 2012

स्वयंवर - अध्याय ग्यारह

अम्बा आमात्य से मिलती है और पूछती है कि जिस चीज का वचन उन्होंने उसे दिया था वो पूरा हुआ अथवा नहीं? आमात्य उसे बताते हैं कि सारी चीजें उसी प्रकार हो रही है जैसा उन्होंने चाहा था. अपनी इच्छा पूर्ण होती देख अम्बा आमात्य का धन्यवाद अदा करती है. उसी दिन काशी नरेश भी अम्बा से मिलते हैं और उसे स्वयंवर के विषय में कुछ निर्देश देते हैं जो कुछ अजीब सा होता है. अम्बा को समझ में नहीं आता कि ये सब अचानक क्या हो रहा है. आगे क्या होता है, ये अगले अध्याय में. 

“अम्बा ने हाथ जोड़ कर ऊपर देखते हुए भगवान का धन्यवाद अदा किया. फिर उसने आमात्य की ओर कृतज्ञ भाव से देखते हुए कहा "मैं आपका आभार कैसे प्रकट करूँ? आपने तो आज मेरे लिए वो किया है जो स्वयं पिताश्री भी नहीं कर पाए.” 

... इसी अध्याय से ...

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