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Sunday, August 26, 2012

स्वयंवर - अध्याय बारह

काशी में स्वयंवर का दिन आ जाता है. सारी तैयारियां की जा चुकी हैं और देश विदेश से स्वयंवर में भाग लेने के लिए प्रतियोगी आ रहे हैं. मगध भी पूरे दल बल के साथ पहुँचता है. भीष्म भी काशी आते हैं. काशी के सेनापति को हस्तिनापुर के दल के बारे में कुछ सूचना मिलती है जिससे वो परेशान हो जाता है. वो इस बात को आमात्य से कहता है और आमात्य उसे इस अवसर पर संयमित रहने को कहते है. हस्तिनापुर के बारे में ऐसा क्या समाचार था. ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“आमात्य, प्रधान सेनापति कहाँ है?” उसने लगभग हाँफते हुए कहा. 

"आराम से सैनिक. क्या बात है?” 

वो कुछ बोलता उससे पहले हीं दोनों की नजर प्रधान सेनापति पर पड़ी जो उधर हीं आ रहे थे. उनके पास आने पर सैनिक उनके सम्मान में झुका और कहा "अच्छा हुआ सेनापति आप मिल गए. मैं आप हीं को खोज रहा था.” 

"अब तो बताओ क्या समस्या है?” आमात्य ने उत्सुकता से पूछा.” 

... इसी अध्याय से ...

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