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Monday, August 27, 2012

स्वयंवर - अध्याय तेरह

अम्बा का स्वयंवर शुरू होता है और अम्बा से एक भयंकर गलती हो जाती है. इस गलती के कारण भीष्म स्वयंवर का विरोध करते हैं और देखते ही देखते पूरा समुदाय स्वयंवर के विरोध में खड़ा हो जाता है. काशी नरेश सभी को समझाने का प्रयत्त्न करते हैं लेकिन बात अब उनके हाथ से निकल चुकी होती है. सारे लोग वाद विवाद में हीं उलझे होते हैं कि भीष्म सभा में अम्बा के अपहरण की बात कर सबको स्तब्ध कर देते हैं. आखिर अम्बा से ऐसी कौन सी गलती होती है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

"बस बहुत हुआ. आप लोगों को जितना आडम्बर करना था वो आप कर चुके किन्तु इसकी सजा तो आपको मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि भविष्य में कोई किसी के साथ ऐसा उपहास करने के विषय में सोचेगा भी नहीं. मैं गंगापुत्र भीष्म..." भीष्म ने अपने स्वर को अत्यधिक ऊँचा करते हुए कहा “...यहाँ उपस्थित सभी राजाओं के सामने ये घोषणा करता हूँ कि मैं क्षत्रियोचित रूप से राजकुमारी अम्बा का हरण कर रहा हूँ. अगर आपमें से कोई मुझे रोकना चाहता है तो आपका स्वागत है.” 

... इसी अध्याय से ...

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