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Tuesday, August 28, 2012

स्वयंवर - अध्याय चौदह

भीष्म के इस घोषणा से सारे सभा में कोहराम मच जाता है. जरासंध सीधे सीधे भीष्म का विरोध करता है. जरासंध को बीच में आता देख कर सारी सभा में दो दल बन जाते हैं. इसी अफरा तफरी में काशी नरेश से भी एक भारी भूल हो जाती है जिससे भीष्म और क्रोधित हो जाते हैं. उसी सभा में भीष्म एक और घोषणा करते हैं जिससे काशी नरेश टूट से जाते हैं. जरासंध चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता. आखिर ऐसा क्या होता है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“अम्बिका और अम्बालिका ने जब ये सुना तो वे इस कदर भयभीत हो गयी कि अम्बा से लिपटकर उन्होंने रोना शुरू कर दिया. पूरी सभा का माहौल बड़ा अजीब सा हो गया और वहाँ उपस्थित प्रत्येक लोग आश्चर्यचकित और सकते में थे. सबकुछ इतनी तेजी से हो रहा था कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था. वहाँ उपस्थित हरेक व्यक्ति अवाक और भयभीत था. इन्द्रधुम्न ने घबराकर कातर स्वर में भीष्म से कहा “कृपया ऐसा न करें भीष्म. मेरे अपराध की सजा आप मेरी पुत्रियों को न दें.” 

भीष्म ने गंभीर होकर कहा “आप समझ नहीं रहे हैं काशी नरेश. सजा मैं आपको हीं दे रहा हूँ.” 

... इसी अध्याय से ...

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