Aug 15, 2012

स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी का मजा

दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस केवल लाल किले पर झंडारोहण के लिए प्रसिद्ध नहीं है. एक और चीज है जो स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली को आकर्षण का केंद्र बनाती है, और वो है पतंगबाजी. लगभग तीन वर्षों से मैं दिल्ली में हूँ लेकिन कभी पतंगबाजी का मजा नहीं लिया. इस बार किस्मत अच्छी थी.

पता नहीं कितने वर्षों से पतंग को हाथ नहीं लगाया था. मुझे याद है बचपन में इसका कितना शौक हुआ करता था. बिहार में इसे गुड्डी भी कहते हैं. उस समय पैसे जेब में होते नहीं थे इसलिए घर पर हीं अखबार की गुड्डीयां बनाया करता था. खासकर मेरे दादाजी इस कला में माहिर थे. धागा हम माँ की सिलाई मशीन से चुरा लिया करते थे और घर पर हीं शीशे और भात से मांजा बना लेते थे. लटेर बनाने के लिए पुराने दन्त मंजन के डब्बों का इस्तेमाल करते थे. बस फिर क्या था. पतंग उड़ने के लिए सारे औपचारिकताओं की पूर्ति हो जाया करती थी. 

आज जब मैंने पतंग अपने हाथ में लिया तो विश्वास नहीं था कि इतने सालों के बाद इसे उड़ा पाउँगा. पर न केवल मैंने पतंग उडाया बल्कि दो पतंगे काटी भी. यकीन नहीं होता पर ये सच है कि मैंने पतंगे भी काटी. हालाँकि समीकरण कुछ ठीक नहीं रहा क्योंकि इसके बदले मेरी छह पतंगे कट गयी. आसमान में जहाँ देखो पतंगों की हीं भरमार थी. और तो और ऐसी ऐसी पतंगे देखने को मिली जो मैंने कभी सोची भी नहीं थी. बेहतरीन दृश्य था और बेहतरीन अनुभव. वाकई आज लगा जैसे मैंने अपने बचपन को जिया हो. आज वाकई स्वतंत्रता का अनुभव हुआ. अब तो अगले स्वतंत्रता दिवस का इंतजार है.