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Monday, September 3, 2012

स्वयंवर - अध्याय सोलह

अचानक वहाँ शाल्व आ जाता है जो पहले से हीं भीष्म को अपना शत्रु समझता है. वहाँ पहुंचकर वो भीष्म को युद्ध के लिए ललकारता है. भीष्म के बार बार समझाने पर भी जब वो नहीं मानता तो विवश होकर भीष्म उससे युद्ध करते है और उसे बुरी तरह पराजित करते हैं. उसके बाद उसे सत्य का पता चलता है जिसके बाद वो भीष्म से मित्रता करने का अनुरोध करता है. ऐसा क्या कारण था कि शाल्व भीष्म से युद्ध करता है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“शाल्व ने आक्रमण का आदेश देने के लिए अपना मुह खोला हीं था कि भीष्म का एक बाण उसके दल के सेनानायक के कंठ को फोड़ता हुआ निकल गया. सेनानायक अपने अश्व से दूर गिर पड़ा और बुरी तरह चीखने और छटपटाने लगा. अपने सेनानायक की ऐसी वीभत्स मृत्यु देख कर शाल्व की सेना के पाँव उखड गए. भीष्म के बारे में उन्होंने जो भी किवदंती सुनी थी वो सत्य हीं थी. उसका सामना कोई नहीं कर सकता.” 

... इसी अध्याय से ...

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