Sep 17, 2012

स्वयंवर - अध्याय अठारह

भीष्म सौभ देश पहुँचते है. वहाँ पहुँचने पर उन्हें कुछ ठीक नहीं लगता और कुछ आशंका होती है. सब कुछ उन्हें बदला बदला लगता है. अंततः वो वहाँ शाल्व से मिलते है. शाल्व उनसे एक ऐसा रहोस्योद्घाटन करता है जिसे सुनकर वे चकित रह जाते हैं. लाख कोशिश के बाद भी वे उसका कारण ढूंढने में सफल नहीं होते. उस स्थिति में वो कुछ नहीं कर सकते हैं इसलिए केवल शाल्व को आश्वासन देकर वे हस्तिनापुर लौट जाते हैं. वापस लौटने के बाद भी वे उन्ही चीजों में उलझे रहते हैं. आखिर कौन सी बात शाल्व उन्हें बताता है? ये हम अगले अध्याय में देखेंगे. 

“पत्र का आखिरी वाक्य पढ़ कर भीष्म सोच में पड़ गए. ये समझना उनके लिए भी कठिन था कि अम्बा ने ऐसा क्यों लिखा. कारण कुछ भी हो लेकिन भीष्म कहीं न कहीं अपने आपको दोषी समझने लगे. उन्होंने शाल्व की ओर देखा जो अपने आसन पर सर पकड़ कर बैठा था. “मैं समझ सकता हूँ कि अभी आप किस परिस्थिति से गुजर रहे हैं...” 

...इसी अध्याय से ...