Sep 21, 2012

स्वयंवर - अध्याय उन्नीस

भीष्म अभी शाल्व की घटना से उबरे नहीं है कि अचानक अम्बा हस्तिनापुर में आती है. भीष्म उसके अनायास आने का कारण नहीं समझ पाते. पूछने पर अम्बा भीष्म को जो बताती है उससे भीष्म सोच में पड़ जाते हैं. उन्हें लगता है कि हो न हो दोनों घटनाओं का कुछ सम्बन्ध जरुर है. परिस्थिति इतनी जटिल हो जाती है कि भीष्म जैसे व्यक्ति के लिए भी उसे सुलझाना कठिन होता है. भीष्म को लगता है कि अब घटनाक्रम एक अलग हीं मोड ले रहा है. अम्बा भीष्म के आखिर क्या बताती है? ये हम अगले अध्याय में जानेंगे. 

“भीष्म कुछ देर सोचते रहे कि इस विषय में सत्यवती को कुछ बताया जाए या नहीं किन्तु वो ये बात भी जानते थे कि वे उनसे कोई बात छुपा नहीं सकते और देर सबेर उन्हें सारी बातें पता चल हीं जाएंगी. भीष्म का दिमाग बड़ी तेजी से चल रहा था. भविष्य में क्या होने वाला है ये शायद उन्होंने अभी से सोचना शुरू कर दिया था और उसकी भूमिका उन्हें पहले से तैयार रखनी पड़ेगी अन्यथा उस वक्त परिस्थितियों का सामना करना बड़ा कठिन हो जाएगा.” 

... इसी अध्याय से ...