Feb 3, 2013

पाकिस्तान की धरती के सामने

पिछले महीने 31 जनवरी को मैं ट्रेनिंग के सिलसिले में गंगानगर (राजस्थान) गया था। वहां जाकर पता चला कि वहां से पाकिस्तान बॉर्डर केवल 30 किलोमीटर दूर है। सोचा इससे अच्छा मौका और नहीं मिलेगा। पता नहीं फिर कब यहाँ आना हो। दोपहर तक मेरी ट्रेनिंग ख़त्म हो गयी और मुझे रात में दिल्ली के लिए निकलना था। काफी समय था मेरे पास इसलिए बॉर्डर पर घूमने का प्लान बनाया। कॉलेज वालों की मदद से एक कैब की व्यवस्था हो गयी और फिर मैं वहां जाने के लिए निकला।

करीब एक घंटे के बाद मैं वहां पहुंचा जहाँ मैं हमेशा जाना चाहता था। पुरे रस्ते सरसों के खेत थे जिसे देखना एक अच्छा अनुभव था। जब बॉर्डर पर बने आर्मी कैंप पर पहुंचा तो अन्दर से एक डर सा था कि पता नहीं वे हमें (मैं और ड्राईवर) अन्दर जाने देंगे या नहीं? दूसरी समस्या ये थी कि पता नहीं वे हमें कैमरा ले कर अन्दर जाने दे या नहीं पर दोनों चीजें ठीक हो गयीं।

हम अन्दर पहुंचे। मैंने अपने मन में बॉर्डर की एक तस्वीर बना रखी थी लेकिन वैसा कुछ देखने को नहीं मिला। बड़ा हीं शांत और सामान्य माहौल था। कुछ दूर चलने के बाद मैंने अपने बिलकुल सामने पाकिस्तान की धरती देखी। ओह, मैं उस समय क्या और कैसा महसूस कर रहा था ये मैं बता नहीं सकता। कहने को तो वो सिर्फ जमीन थी। बिलकुल वैसी हीं जिसपर मैं खड़ा था। फर्क क्या था? केवल एक बाढ़ का? थोडा अजीब भी लगा कि एक ही जमीन को लोहे के एक बाढ़ ने दो अलग अलग देशों में बाँट दिया है। लेकिन सच यही था।

कुछ चीजें बड़ी अजीब थी। दोनों और खेत थे जहाँ किसान खेती कर रहे थे। एक साथ हिंदुस्तानी और पाकिस्तान के किसानों को काम करते देखना एक अलग और सुखद अनुभव था। वहां के सिपाहियों ने बताया कि दोनों ओर के स्थानीय किसान अक्सर इधर से उधर आते जाते रहते हैं। उन लोगों के लिए दोनों और की सरकारों ने विशेष कार्ड बनाया हुआ है। दोनों ओर से अपनी अपनी चौकियों से भारतीय और पाकिस्तानी सैनिक सारी गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

वही से मैंने कई लोगों को फ़ोन किया। आखिर वहां होना कोई छोटी मोटी बात तो थी नहीं। कुछ देर वहां रहने के बाद हम वापस गंगानगर की ओर चल दिए। ऐसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था जो मैंने वहां एक घंटे में किया।जो भी था, जैसा भी था, मजेदार और कभी ना भूलने वाला अनुभव था।