Oct 27, 2016

"Jio" - बाप रे बाप!

जब से रिलायंस ग्रुप ने "जिओ" को लांच करने की बात की थी, पूरे टेलीकॉम जगत में जैसे हलचल सी मच गयी थी। ऑफर भी जबरदस्त था। कुछ भी करो सब मुफ्त। और हम सभी जानते हैं कि मुफ्त की चीजों की भारत में कितनी इज्जत और जरुरत है। मैं भी हैरान था कि आखिर कोई कंपनी इतनी कीमत पर डाटा और मुफ्त में कॉल क्यों उपलब्ध करवा रही है? वैसे ख़ुशी भी थी क्योंकि इससे बाँकी कंपनियों की मनमानी बंद हो जानी थी जो लगातार डाटा की कीमतें बढ़ा रहे हैं। तो आज मैं जियो के बारे में अपना अनुभव बाँटना चाहता हूँ।

उससे पहले २००९ में चलते हैं। मैं नया नया दिल्ली में आया था और एक मोबाइल नंबर लेना चाहता था (उस समय मोबाइल पोर्टेबिलिटी का विकल्प नहीं था)। मेरे एक परिचित ने कहा कि नया नंबर लेने की क्या जरुरत है? तुम मेरा रिलायंस का सिम इस्तेमाल कर लो। सबसे सस्ता है। मैंने देखा कि रेट्स तो वाकई जबरदस्त हैं। कोई और मोबाइल कंपनी उनके प्लान्स के आस-पास भी नहीं थी। मैं बड़ा खुश था। फटाफट जाकर २०० रूपये का रिचार्ज करवा आया। फिर मैंने सोचा कि सब को फ़ोन करके अपना नंबर दे दूं। घर फ़ोन मिलाया तो नेटवर्क बिजी आया। फिर किया, फिर बिजी। करता रहा, करता रहा और कुछ २५-३० प्रयासों के बाद फ़ोन मिला। मैंने सोचा शायद आज समस्या है किन्तु पता चला कि रिलायंस के साथ ये हमेशा की समस्या है। कई बार इतना चिढा कि फ़ोन पटकते पटकते खुद को रोकना पड़ा। मैंने २०० रुपयों में केवल ५-६ रूपये खर्च किये फिर रिलायन्स को छोड़ने का फैसला किया। ये स्थिति थी कि मैं अपने अकाउंट में पड़े पूरे रुपयों को खर्च भी नहीं कर पाया। अंततः हार कर मैंने एयरटेल का सिम लिया जिसमे कभी कोई समस्या नहीं आयी। हालाँकि बाद में एयरटेल को भी छोड़ना पड़ा पर वो कहानी फिर कभी। 

वापस आते हैं। हमारे ऑफिस में जिओ वालों ने एक काउंटर लगाया था। कई बार सोचा कि मैं भी सिम ले लूँ पर भीड़ देख कर हिम्मत नहीं हुई। एक दिन जब वे थोड़ा जल्दी आ गए और ज्यादा भीड़ नहीं थी, मैं फटाफट अपना आधार कार्ड लेकर पहुँच गया। उन्होंने बताया कि आपका आधार कार्ड बिहार का है इसलिए आप बिहार में ही जिओ सिम ले सकते हैं, कलकत्ता में नहीं। बड़ी हैरानी हुई। अरे भाई! फिर आधार कार्ड का अर्थ हीं क्या है? "Aadhaar - one nation one identity" का क्या मतलब हुआ। बहस करने का कोई फायदा नहीं हुआ और मैं वापस आ गया। 

पिछले हफ्ते मैं अपने घर भागलपुर में था। घर से कंपनी का काम करने के लिए इन्टरनेट चाहिए था और वोडाफोन पर 3G बड़ा महँगा पड़ रहा था। सोचा यहाँ जिओ ले लूँ तो समस्या हल हो जाएगी। बहुत खोजा पर कही भी सिम उपलब्ध नहीं था। फिर पता चला कि ब्लैक में सिम मिल सकता है। अरे वाह! अभी तक तो ब्लैक में सिनेमा की टिकटें बिकती थी पर अब सिम कार्ड भी? सोचा थोड़ा खर्चा कर अगर मिल सकता है तो ले ही लेता हूँ। कम से कम महँगे इन्टरनेट से मुक्ति तो मिलेगी। फटाफट "MyJio" ऍप डाउनलोड किया और अपना कोड उपलब्ध हो गया। आधार कार्ड लेकर स्टोर पर पहुँचा। फिंगरप्रिंट दिए और अपना कोड उन्हें दिया। ये क्या? उन्होंने कहा कि आपका कोड किसी ने हैक कर लिया है। मैंने पूछा क्या सचमुच? ये कोड भी हैक होता है? उन्होंने कहा अजी क्या कहें? जिओ की इतनी मारामारी है कि पूछिये मत। मैंने कहा अब क्या उपाय है? उन्होंने कहा कि हम कोई और कोड डाल देंगे पर उसका १०० रुपया अलग से लगेगा। मरता क्या ना करता, कहा डाल दो। तो भाईसाहब ने मेरे वाले सीरीज के कोड्स ट्राय करना शुरू कर दिया। मैंने हँसता हुआ देखता रहा। शायद इसी तरह से कोड हैक किया जाता है। २०-२५ मिनट के अथक परिश्रम के बाद उन्हें एक कोड मिल गया और मुझे मेरा जिओ नंबर। उन्होंने कहा २ घंटों में आपका सिम शुरू हो जायेगा। ५०० रूपये सिम के (ब्लैक में) और १०० रूपये कोड के (जो उसने किसी और का हैक कर लिया) देने पड़े पर मन बड़ा प्रसन्न था। 

घर आया। सिम के एक्टिवेशन का मैसेज आ गया। सिम लगाया तो पता चला कि सिग्नल ही नहीं आ रहा। घर में इधर उधर घूम कर देखा तो अंततः सिग्नल का एक डंडा आया। चलो कुछ तो मिला। फटाफट लैपटॉप कनेक्ट किया पर ब्राऊज़र घूमता ही रहा। स्पीड ऐसी थी कि 2G भी शरमा जाये। बड़ी समस्या थी। बेकार का पैसा चला गया। काम करने के लिए अपने वोडाफोन नंबर को ही इस्तेमाल करना पड़ा। सोचा चलो कोई बात नहीं। इन्टरनेट नहीं चल रहा तो क्या हुआ रोमिंग में मुफ्त फ़ोन तो कर सकूँगा। फ़ोन लगाया तो फ़ोन लगा ही नहीं। यहाँ तक कि जिओ वेरिफिकेशन भी नहीं कर पा रहा था। बड़ा गुस्सा आया। वापस स्टोर गया तो उन्होंने कहा आज भर रुक जाइये कल से चालू हो जायेगा। चलो ये भी ठीक है। अगला दिन आया फिर भी फ़ोन नहीं लगा। फिर स्टोर पहुँचा तो बड़ा क्रन्तिकारी जवाब मिला "आपका इन्टरनेट तो चल रहा है ना? फ़ोन किसी का नहीं लग रहा। आप अभी इन्टरनेट से ही काम चलाइये। वैसे भी मुफ्त में कंपनी और क्या क्या देगी?" जवाब सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। अरे यार मैंने थोड़े ही बोला था सबकुछ फ्री देने को? पैसे ही ले लेते पर बढ़िया सर्विस तो देते। खैर क्या करता वापस आ गया। जैसे तैसे कछुआ छाप इन्टरनेट को ही इस्तेमाल किया। 

लगातार कोशिश कर रहा था कि कॉल की सेवा शुरू हो जाये। अनंत प्रयासों के बाद आखिर एक बार वैरीफ़िकेशन नंबर मिला और सिम एक्टिवटे हो गया। सोचा चलो एक काम तो हुआ। एक फ्री की कॉल तो बनती है। फ़ोन मिलाया, नहीं मिला। दो बार, तीन बार, चार बार... ३८ बार मिलाने के बाद भी कॉल नहीं लगा तो हिम्मत जवाब दे गयी। दूसरों को कहा उस नंबर पर कॉल करने को तो उन्होंने भी कहा कि मिल ही नहीं रहा। सोचा फ़ोन ही ख़राब हो गया क्या? पर जब वोडाफोन से मिलाया तो तुरंत मिला। एयरटेल, बीएसएनएल, एयरसेल सबको ट्राय किया किसी में कोई समस्या नहीं हुई। जिओ को दुसरे फ़ोन में इस्तेमाल किया तो भी वही समस्या। अंत में मैंने उससे फ़ोन मिलाना ही छोड़ दिया। सोचा जब कलकत्ते जाऊंगा तो बढ़िया 4G सिग्नल मिलेगा और कॉल भी लगेगी। कलकत्ता पहुँचा तो सिग्नल में एक और डंडे की बढ़ोत्तरी हुई पर स्पीड वही 2G वाली। कॉल लगाया तो लगा नहीं। हर बार एक देवीजी नेटवर्क के बिजी होने की सूचना देती थी। हालात तो ये हैं कि कॉल मिलाते ही एक सेकंड के अंदर नेटवर्क बिजी का मैसेज आ जाता है। लगता है जैसे रिकार्डेड मैसेज चला रखा हो। आज सिम को लिए ७ दिन हो चुके हैं और सैकड़ों बार नंबर मिलाने के बाद भी मैं इससे केवल दो कॉल ही कर पाया हूँ। इन्टरनेट के साथ समस्या ये है कि जिओ केवल 4G/LTE बैंड पर ही काम करता है। मतलब ये कि हम तो अपनी स्पीड पे नहीं ही चलेंगे पर अगर आप कम स्पीड पे चलना चाहें तो वो भी हमारे शान के खिलाफ है। कसम से २००९ का दिल्ली वाला वाकया याद आ गया। खैर जो भी हो। एक फ़ालतू सिम के लिए मैं अपना बी.पी. नहीं बढ़ा सकता।

अंततः समझ में आया कि श्री मुकेश अम्बानी हर चीज फ्री क्यों दे रहे थे। अरे भाई अगर कॉल लगेगी ही नहीं तो फ्री ही हुई ना? और श्री नरेंद्र मोदी ने भी शायद बिना सोचे अपना चेहरा और डिजिटल इंडिया का टैग जिओ को दे दिया। एक बार इस्तेमाल तो कर लिया होता श्रीमान। आपने भी कान पकड़ लिए होते। रही बात शाहरुख़ खान साहब की तो उन्हें तो अपना चेहरा (जो मैं तो नहीं देखना चाहता) दिखने के पैसे मिल ही चुके होंगे। ये भी समझ में आ गया कि जनता को मूर्ख बनाने में केवल सरकारी विभाग ही कुशल नहीं है। प्रतिभावान लोगों की कमी थोड़े ही है विश्व में। 

जाते जाते मैं सिर्फ एक बात श्री मुकेश अम्बानी से पूछना चाहूंगा। अगर कोई व्यक्ति विशेषकर महिला विपत्ति में फँस जाये और उसके पास केवल आपका महान जिओ सिम हो तो उसे होने वाली हानि (जो कभी कभी बहुत ही गंभीर हो सकती है) का जिम्मेदार कौन होगा? मेरे विचार में जब कोई भी मुसीबत में हो तो वो कभी भी ये नहीं सुनना चाहेगा - "इस रुट की सभी लाइनें अभी व्यस्त हैं। कृपया थोड़ी देर बाद प्रयास करें।"