Jan 20, 2018

समझ नहीं आ रहा कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं।

दुनिया बड़ी तरक्की कर रही है। हर क्षेत्र में हम केवल आगे ही बढ़ते जा रहे हैं, ऐसा कई लोगों का मानना है। पर मेरी तरह चुनिंदा लोग हैं जो बड़े पशोपेश में है। समझ नहीं आता कि आखिर बढ़ किस ओर रहे हैं। सभी लोग खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है, मैं भी ऐसा चाहता हूँ। स्टार्टअप्स का जमाना है इसका मूलभूत सिद्धांत है कि कुछ नया सोचो और नया करो। जिस तरह लोग, खासकर युवा अपने स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं वो वाकई काबिलेतारीफ़ है। खासकर जब कोई चीज अंधाधुंध होती है तो कई चीजें ऐसी निकल कर सामने आती है जो बड़ी अजीब होती है। पैसे कमाने को कोई हर्ज नहीं पर पैसा कैसे कमाया जा रहा है ये देखना बहुत जरुरी है।

सोचता हूँ पहले बता दूँ कि इस पोस्ट को लिखने की जरुरत क्यों पड़ी फिर अपना पक्ष रखना उचित होगा। इससे पहले मैं आगे कुछ लिखूँ, मैं बड़ी विनम्रता से ये पहले बता देना ठीक समझता हूँ कि ये सिर्फ मेरी सोच है। जरुरी नहीं है कि आपकी सोच मुझसे मिलती हो। तो कोई कृपया ये ना सोचे कि मैं अपनी सोच को सही और आपकी सोच को गलत बता रहा हूँ। बस हमारी सोच एक दूसरे से अलग हो सकती है।

आज फेसबुक पर एक कंपनी का एड देखा जो बैंगलोर की एक स्टार्टअप है। इसका नाम "ड्रिंक प्राइम" (www.drinkprime.in) है। जैसा मुझे एड से समझ में आया वो ये कि ये कंपनी वाटर प्यूरीफायर को किराये पर देती है। पहली नजर में मुझे ये ठीक ही लगा क्युकि मेरे जैसे लाखों व्यक्ति बाहर काम करने को जाते हैं और वहाँ हजारों रूपये का वाटर प्यूरीफायर खरीदते हैं और जब वापस कही और जाना होता है तो उसे आने पौने दाम पर बेचना पड़ता है। यहाँ पर भी मेरा एक पक्ष है जो मैं अंत में रखूँगा। तो जैसा कि मैंने बताया मुझे ये थोड़ा ठीक लगा कि हजारों रूपये का प्यूरीफायर खरीदने के या ४०-५० रूपये प्रति बोतल पानी खरीदने से अच्छा ये है कि ये उपकरण किराये पर ले लिया जाये। तो मैंने कालबैक का अनुरोध डाल दिया। कुछ मिनटों में मुझे उनकी ओर से एक कॉल आया और फिर जो बात हुई वो कमाल की थी। बात अंग्रेजी में हुई थी, मैं अनुवाद कर रहा हूँ।

मैंने उनसे पूछा कि "ये उपकरण का मासिक किराया क्या है?" जवाब मिला, "३५० रूपये प्रति महीने से शुरू है।" मैंने पूछा - "शुरू है"? इसका क्या मतलब है? क्या इस उपकरण के अलग अलग मॉडल है? उसने कहा "नहीं। मॉडल तो केवल एक ही है लेकिन पानी के लिमिट पर किराया निर्भर करता है।" ये अजीब था। मैंने उसे पूरी बात बताने को कहा तो उसने बताया कि जो ३५० रूपये का प्लान है, उसमे महीने का केवल १०० लीटर पानी आप इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको उससे अधिक पीना है तो आप ५०० या ७५० रूपये प्रति महीने का प्लान ले सकते हैं। मैं हैरान था। समझ में नहीं आया कि क्या बोलूं। मैंने सिर्फ इतना पूछा कि "अगर मैंने १०० लीटर पानी २० दिन में ही ख़त्म कर दिया तो?" जवाब मिला "तब ये मशीन पानी देना बंद कर देगी।" उसने आगे कहना जारी रखा - "आपको इसका ख्याल रहे कि आप तय सीमा से अधिक पानी खर्च ना करें। वैसे इसकी नौबत नहीं आएगी क्युकि आप इसे अपने स्मार्टफोन पर कॉन्फ़िगर कर सके हैं और पानी की लिमिट चेक करते रह सकते हैं। और अगर आपके पानी का लिमिट ख़त्म भी हो जाये तो आप ३ रूपये प्रति लीटर के हिसाब से रिचार्ज कर सकते हैं और जैसे ही आपका रिचार्ज अमाउंट हमें मिल जाएगा, आपका उपकरण हमारे सर्वर से सिंक हो जाएगा और आप फिर से पानी का इस्तेमाल कर सकेंगे। अगर आपने १०० लीटर से कम पानी खर्च किया तो उस महीने का बचा हुआ कोटा बर्बाद हो जाएगा और अगले महीने आपको फिर से १०० लीटर प्रति महीने का कोटा दे दिया जाएगा।" मैं इससे आगे नहीं सुन सकता था इसीलिए हँसते हुए फ़ोन काट दिया।



अब मैं अपने पक्ष पर आता हूँ। इससे अधिक वाहियात बात मैंने आज तक नहीं सुनी। कई लोग जो अपने आप को प्रोफेशनल कहते हैं शायद मुझसे पूछ सकते हैं कि इसमें गलत क्या है पर मैं कहता हूँ कि इसमें सब गलत ही गलत है। मन में बड़ा आवेश है और बहुत कुछ कहना चाहता हूँ पर इसे संक्षेप में ही कहूँगा क्यूंकि अगर सब कहने बैठा तो शायद लिखता ही रहूँ।

आप समझिये हम कर क्या रहे हैं। पानी जैसे मूलभूत चीज को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मैं बहुत पहले से ही पानी की बिक्री, और वो भी इतने ऊंचे मूल्य पर, से असहमत रहा हूँ लेकिन ये तो घटियापन की हद है। इसके अनुसार अब आप जब भी पानी पिएंगे, आपको एक बार ये ख्याल जरूर आएगा कि भाई लिमिट भी चेक कर लें। अगर आप कुछ अधिक पानी पी चुके हों तो शायद आप जी भर कर पानी भी ना पी पाएं। अगर पी भी लें तो दिल को सकून नहीं मिल पायेगा। पानी जैसे ईश्वर के वरदान का ऐसा दुरुपयोग और उसपर ऐसा अधिकार देखना दुर्लभ है। कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ वर्षों बाद पैसों के भूखे लोग हवा पर भी अपना अधिकार ज़माने का प्रयास करें और कहें कि अधिक ऑक्सीजन लेना हो तो रिचार्ज करवाएं। पैसा बहुत जरूरी है लेकिन उसके लिए इस स्तर तक भी गिर जाना उचित नहीं। हमारे बिहार में एक कहावत है कि पैसे के लालची लोग लाश पर से भी पैसे उठाने से संकोच नहीं करते। जिस तेजी से हम पैसे कमाने के हर संभव तरीके को अपनाने से परहेज करने से बच रहे हैं, वो दिन दूर नहीं जब ये कहावत भी यथार्थ साबित हो जाएगी। शायद हमारे मरने के बाद चिता की लकड़ी भी हमें नीलामी के पैसे देकर नसीब हो।